रूस के खिलाफ जारी युद्ध में यूक्रेन अब आधुनिक सैन्य तकनीक के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। यूक्रेन ने युद्धक्षेत्र में मानवरहित जमीनी वाहनों (UGVs) यानी रोबोट सैनिकों के उपयोग को तेजी से बढ़ाते हुए वर्ष 2026 की पहली छमाही में 25 हजार UGVs तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन अत्याधुनिक रोबोटों का उपयोग सैनिकों की जान बचाने तथा युद्ध संचालन को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। यूक्रेन के ये रोबोट बारूदी सुरंगें बिछाने, घायल सैनिकों को सुरक्षित निकालने, रसद एवं सैन्य सामग्री पहुंचाने तथा दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने जैसे कार्यों में सक्षम हैं। यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने जानकारी दी कि अप्रैल माह में UGVs के माध्यम से 10,281 सफल मिशन संचालित किए गए, जिनमें आपूर्ति पहुंचाने और सैनिकों की निकासी जैसे अभियान शामिल रहे।हाल ही में एक अभियान के दौरान एक जमीनी रोबोट को पुल पर टैंक रोधी बारूदी सुरंग लगाने के लिए भेजा गया। इसी दौरान ऑपरेटरों ने पास में मौजूद तीन रूसी सैनिकों को देखा, जिसके बाद रोबोट का मार्ग बदलते हुए विस्फोट किया गया। इस कार्रवाई में तीनों रूसी सैनिकों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है। K-2 ब्रिगेड की UGV बटालियन के कमांडर मेजर Oleksandr Afanasiev ने बताया कि यूक्रेन के पास हजारों UGVs मौजूद हैं और इनका उद्देश्य सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। K-2 ब्रिगेड को दुनिया की पहली ऐसी सैन्य इकाई माना जा रहा है, जो पूर्ण रूप से मानवरहित जमीनी युद्ध प्रणाली पर आधारित है।ब्रिगेड के अंतर्गत तारहान 200, तारहान 300, रिस PRO तथा SIM-RACAR-Lambda जैसे उन्नत रोबोटिक सिस्टम का उपयोग किया जा रहा है। यूक्रेन ने इन रोबोटों पर फ्लेमथ्रोअर और कब्जे में ली गई रूसी राइफलों को लगाने के प्रयोग भी किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, नए हाइब्रिड इंजन तकनीक के माध्यम से इन रोबोटों की ऑपरेशनल रेंज 30 मील से बढ़ाकर 90 मील तक की जा रही है, जिससे वे दुश्मन की सीमा के भीतर गहराई तक जाकर अभियान चला सकेंगे। युद्धक्षेत्र में रोबोटिक तकनीक का यह व्यापक उपयोग भविष्य के सैन्य अभियानों की दिशा बदल सकता है और रूस के लिए नई रणनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकता है।