मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है, जहां रेचेप तैय्यप एर्दोगन के हालिया बयान के बाद इजरायल और तुर्की के बीच रिश्तों में तल्खी और बढ़ गई है। एर्दोगन ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्र में संघर्ष नहीं रुका, तो तुर्की इजरायल के खिलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है, जैसा कि उसने नागोर्नो-काराबाख और लीबिया में किया था।इस बयान के बाद इजरायल की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्री के वीपी शाय गाल ने कहा कि “ईरान केवल एक पूर्वाभ्यास था और अब तुर्की की फाइल भी खुल चुकी है।” उन्होंने संकेत दिया कि इजरायल तुर्की के खिलाफ खुफिया अभियानों, साइबर हमलों और टारगेटेड स्ट्राइक जैसी रणनीतियों पर विचार कर रहा है।तनाव उस समय और बढ़ गया जब तुर्की ने बेंजामिन नेतन्याहू सहित इजरायल के कई वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कड़ी सजा की मांग उठाई। तुर्की की ओर से इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, जिनमें क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देने के आरोप शामिल हैं।इजरायली विशेषज्ञों के अनुसार, तुर्की के अक्कूयू न्यूक्लियर पावर प्लांट और बैलिस्टिक मिसाइल ठिकाने संभावित सैन्य लक्ष्य हो सकते हैं। साथ ही, उत्तरी साइप्रस में तुर्की की सैन्य गतिविधियों को भी इजरायल के लिए खतरे के रूप में देखा जा रहा है।इजरायल ने यह भी आरोप लगाया है कि हमास को तुर्की से समर्थन मिल रहा है, और इसके नेता वर्षों से तुर्की में सक्रिय हैं। इस संदर्भ में इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आत्मरक्षा (अनुच्छेद 51) का हवाला देते हुए संभावित कार्रवाई की चेतावनी दी है।विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाज़ी और सैन्य तैयारी क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की जा रही है कि वह इस तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज करे।