गोंडवाना आदिवासी कला केंद्र

बालाघाट में नक्सल उन्मूलन के बाद विकास को मिलेगी नई गति, जनजातीय महोत्सव के आयोजन पर जोर,

डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के बालाघाट जिले में नक्सल उन्मूलन के बाद अब विकास कार्यों को तीव्र गति से आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन एवं अमित शाह के निर्देशन में लागू की गई कार्ययोजना के परिणामस्वरूप प्रदेश में नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नक्सलवाद से वर्षों तक प्रभावित रहे बालाघाट सहित अन्य क्षेत्रों में अब विकास की गति को और तेज करने की आवश्यकता है। राज्य सरकार इस दिशा में प्राथमिकता के साथ कार्य कर रही है तथा जनजातीय समाज की प्रतिभाओं को विभिन्न मंचों के माध्यम से प्रोत्साहित किया जा रहा है।शुक्रवार को समत्व भवन में मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में आगामी माह बालाघाट में आयोजित होने वाले जनजातीय महोत्सव के संबंध में विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। बैठक में जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, मुख्य सचिव अनुराग जैन सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जनजातीय महोत्सव में सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियों के साथ विभिन्न विभाग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिविर आयोजित करें। “धरती आबा अभियान” के अंतर्गत हितग्राहियों को लाभान्वित करने, स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेगा स्वास्थ्य शिविर एवं सिकल सेल स्क्रीनिंग आयोजित करने, शिक्षा सुविधाओं के विस्तार, महिलाओं एवं बच्चों के कल्याण, रोजगार सृजन तथा दिव्यांगजनों को लाभ प्रदान करने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं।उन्होंने “एक बगिया मां के नाम” कार्यक्रम के तहत पौधरोपण गतिविधियों तथा आराधना स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के विकास पर भी बल दिया। साथ ही नक्सल गतिविधियों से प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

महोत्सव में जनजातीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें बैगा समुदाय के पारंपरिक लोकनृत्य, बिदरी, बीज पंडूम एवं बड़ा देव पूजा जैसे सांस्कृतिक आयोजन शामिल होंगे। इसके अतिरिक्त बोरा दौड़, मटका रेस एवं तीरंदाजी जैसी खेल प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।बैगा महिलाओं की पारंपरिक गोदना कला का प्रदर्शन एवं कार्यशालाएं आयोजित होंगी, साथ ही कोदो-कुटकी एवं महुआ से बने पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल लगाए जाएंगे। पारंपरिक जड़ी-बूटियों एवं औषधीय ज्ञान से जुड़े विशेषज्ञों का सम्मेलन भी प्रस्तावित है। स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री हेतु स्टॉल लगाए जाएंगे।इस महोत्सव में बालाघाट के साथ-साथ आसपास के जिलों एवं छत्तीसगढ़ से भी जनजातीय समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।बैठक में जानकारी दी गई कि महोत्सव के सफल आयोजन हेतु स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, जनजातीय कार्य, उच्च शिक्षा, वन, महिला एवं बाल विकास, किसान कल्याण, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, कौशल विकास एवं रोजगार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, सहकारिता, संस्कृति, पर्यटन, खनिज, गृह एवं जनसंपर्क विभाग सक्रिय भूमिका निभाएंगे।


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