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नाबालिग पारधी जनजाति की बेटी “मोनालिसा” मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच में बड़ा खुलासा,

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा मध्य प्रदेश की पारधी जनजाति की बेटी “मोनालिसा” से जुड़े मामले में की गई विस्तृत जांच में एक गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। आयोग ने पुष्टि की है कि संबंधित युवती, जिसे बालिग बताकर विवाह कराया गया था, वास्तव में नाबालिग है।आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य के नेतृत्व में गठित जांच दल ने, पूर्व न्यायाधीश एवं आयोग के सलाहकार प्रकाश उइके के मार्गदर्शन तथा अधिवक्ता प्रथम दुबे की कानूनी पैरवी के आधार पर इस संवेदनशील मामले की गहन पड़ताल की।


जांच के प्रमुख निष्कर्ष:

  • सरकारी अस्पताल, महेश्वर के रिकॉर्ड के अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ, जिससे 11 मार्च 2026 को हुए विवाह के समय उसकी आयु मात्र 16 वर्ष 2 माह 12 दिन थी।
  • विवाह के लिए उपयोग किया गया जन्म प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया, जिसमें जन्मतिथि गलत (01/01/2008) दर्शाई गई थी।
  • यह फर्जी प्रमाण पत्र नगर पालिका महेश्वर से जारी किया गया था, जिसे अब निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
  • जांच की शुरुआत केरल के एक मंदिर से हुई, जहां विवाह संपन्न हुआ था, और वहां प्रस्तुत दस्तावेज आधार कार्ड पर आधारित पाए गए।

संदिग्ध पहलू और आरोप:

  • शिकायत में विवाह के पीछे राजनीतिक हस्तक्षेप और संगठित नेटवर्क की आशंका जताई गई है।
  • कथित रूप से कुछ संगठनों एवं राजनीतिक व्यक्तियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
  • मामले में “फॉल्स नैरेटिव” तैयार करने की साजिश और संभावित विदेशी फंडिंग की भी जांच की मांग की गई है।
  • साथ ही, आदिवासी समुदाय से जुड़ी बच्चियों के संभावित शोषण, तस्करी और देह व्यापार जैसे गंभीर एंगल की जांच की आवश्यकता बताई गई है।

कानूनी कार्रवाई:

मध्य प्रदेश के महेश्वर थाने में आरोपी फरमान के खिलाफ निम्न धाराओं में FIR दर्ज की गई है:

  • POCSO Act – नाबालिग से संबंधित अपराध
  • SC/ST Atrocities Act – अनुसूचित जनजाति की पीड़िता के कारण
  • भारतीय न्याय संहिता (BNS) – साजिश एवं अवैध विवाह से जुड़े प्रावधान

प्रशासन और पुलिस पर सवाल:

  • केरल में विवाह के दौरान भारी पुलिस सुरक्षा और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति पर गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं।
  • यह भी सामने आया कि संबंधित व्यक्तियों को स्थानीय नेताओं द्वारा लंबे समय से संरक्षण प्राप्त था।
  • केरल पुलिस द्वारा पर्याप्त जांच न किए जाने पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

आयोग की आगामी कार्रवाई:

  • आयोग ने 22 अप्रैल 2026 को केरल एवं मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशकों (DGP) को नई दिल्ली तलब किया है।
  • मामले की विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी जाएगी।
  • आयोग ने दोनों राज्यों से हर तीन दिन में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग की जांच ने यह स्पष्ट कर दिया है कि नाबालिग लड़की के साथ कानून का गंभीर उल्लंघन हुआ है। मामले में शामिल सभी दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने स्पष्ट किया है कि वह इस प्रकरण की निगरानी तब तक जारी रखेगा जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल जाता।

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