
स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट प्रोजेक्ट से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित घोटाले की जांच में अब नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। सेक्टर-32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की लापरवाही के चलते सामने आए इस मामले में अब एक वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।जांच एजेंसी को मिले प्राथमिक साक्ष्यों के अनुसार संबंधित आईएफएस अधिकारी की पत्नी के बैंक खाते में करीब 75 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की राशि ट्रांसफर की गई, जिससे गोवा में एक संपत्ति खरीदी गई। फिलहाल विशेष जांच दल (एसआईटी) इन लेन-देन के स्रोत और आपसी संबंधों की गहन जांच कर रहा है।इस घोटाले में नगर निगम से जुड़े लगभग 116 करोड़ रुपये और क्रेस्ट प्रोजेक्ट से जुड़े करीब 83 करोड़ रुपये के फंड में अनियमितताओं की बात सामने आई है। अब तक एसआईटी इस मामले में 10 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है और कई अन्य से पूछताछ जारी है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर एनपी शर्मा से भी पूछताछ की जा चुकी है।जांच में खुलासा हुआ है कि सरकारी फंड को शेल कंपनियों के माध्यम से ट्रांसफर कर रियल एस्टेट में निवेश किया गया, ताकि अवैध रूप से लाभ कमाया जा सके। कई शेल कंपनियां ड्राइवरों, पत्नियों और करीबी सहयोगियों के नाम पर बनाई गई थीं।कैपको इन्फोटेक कंपनी भूपिंदर सिंह और सपना के नाम पर रजिस्टर्ड पाई गई, जो बैंक के एक शाखा प्रबंधक के ड्राइवर हेमराज की पत्नी हैं। इसी तरह आरएस ट्रेडर्स का मालिक भी हेमराज को दर्शाया गया। वहीं, स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट कंपनी स्वाति सिंगला और उनके भाई के नाम पर बनाई गई, जो बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर अभय कुमार से संबंधित बताई जा रही हैं।
अब तक गिरफ्तार प्रमुख आरोपित
- नलिनी मलिक (पूर्व मुख्य वित्त अधिकारी) – फर्जी एफडीआर और रिश्वतखोरी
- सुखविंदर सिंह अबरोल (पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर, क्रेस्ट) – फंड डायवर्जन
- साहिल कुक्कड़ (हेड ऑफ अकाउंट्स) – फर्जी लेन-देन में भूमिका
- रिभव ऋषि (पूर्व बैंक मैनेजर) – शेल कंपनियों के जरिए फंड ट्रांसफर
- अभय कुमार (रिलेशनशिप मैनेजर) – फर्जी एफडीआर तैयार करना
- सीमा धीमान (बैंक ऑथराइजर) – संदिग्ध ट्रांजेक्शन की मंजूरी
- विक्रम वधवा (रियल एस्टेट कारोबारी) – निवेश में भूमिका
- स्वाति सिंगला, अभिषेक सिंगला, अंकुर शर्मा – शेल कंपनी संचालन
घोटाले का खुलासा कैसे हुआ
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के समाप्त होने के बाद उसकी ग्रांट और एफडी नगर निगम को ट्रांसफर की जानी थी। इसी दौरान फर्जी एफडी रसीद का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि एफडी की राशि निकालकर शेल कंपनियों में स्थानांतरित कर दी गई और बाद में उसे रियल एस्टेट में निवेश कर दिया गया।मामला उजागर होने के बाद पुलिस को शिकायत दी गई, जिसके आधार पर एसआईटी का गठन कर जांच शुरू की गई। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस मामले में आगे और बड़े नाम सामने आने की संभावना है।