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भोपाल के पास सिद्धपुर में सीवन नदी जीर्णोद्धार अभियान ने मचाई धूम,

सिद्धपुर (सीहोर), मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे प्राचीन नगर सिद्धपुर एक बार फिर विश्व पटल पर छाया हुआ है। इस बार सुविख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा का नाम नहीं, बल्कि युवा राष्ट्रसेवक और समाजसेवी प्रदीप चावड़ा चर्चा में हैं। सनातन संस्कृति से सराबोर इस नगर की जीवनदायिनी मां सीवन नदी के जीर्णोद्धार का बीड़ा उठाने वाले चावड़ा ने ‘मैं पुत्र सीवन का’ अभियान शुरू किया है, जो देश-विदेश में सराहना बटोर रहा है।अनंत काल से सिद्धपुरवासियों को पवित्र जल से निर्मलता प्रदान करने वाली सीवन नदी अब जीर्ण-शीर्ण हो चुकी है। वरिष्ठ युवा पत्रकार और समाजसेवी प्रदीप चावड़ा ने जनकल्याण के लिए ‘स्वच्छ सीवन, स्वस्थ जीवन’ का सपना देखा। एक पुत्र के नाते उन्होंने मां सीवन के संरक्षण का संकल्प लिया और 5000 ‘सीवन पुत्र-पुत्री’ बनाने का लक्ष्य रखा। इस अभियान में सिद्धपुर सहित विश्व भर के समाजसेवी संगठन और सम्मानित नागरिक योगदान दे रहे हैं। चावड़ा की यह पहल भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पंक्तियों को चरितार्थ करती है: “टूटे हुए तारों से फूटे वासंती स्वर, पत्थर की छाती में उग आया नव अंकुर। हार नहीं मानूंगा, रार नहीं ठानूंगा, काल के कपाल पर लिखता-मिटाता हूं, गीत नया गाता हूं।”हनुमान फाटक धाम सिद्धपुर के कथावाचक पंडित रविशंकर तिवारी ने विशेष अतिथि के रूप में मजदूर सम्मान समारोह में कहा कि हनुमान फाटक धाम पर स्थित सीवन नदी के तट पर असीम संभावनाएं हैं। यहां हनुमान फाटक से भूतेश्वर महादेव मंदिर तक नौकायान चल सकता है। तटों पर पिचिंग, लैंप और फव्वारे लगाए जा सकते हैं। तिवारी जी बोले, “यह मध्य प्रदेश का एकमात्र धार्मिक स्थल बनेगा, जहां प्राचीन मंदिरों की श्रृंखला होगी। पर्यटन स्थल के रूप में इससे लोगों को रोजगार मिलेगा।”अभियान के तहत नदी सफाई, तटबंध मजबूती और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है। स्थानीय निवासी उत्साहित हैं। प्रदीप चावड़ा ने कहा, “मां सीवन का पुत्र बनकर हम सभी मिलकर इसे पुनर्जीवित करेंगे। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर की रक्षा भी है।” सिद्धपुर के बाजारों में अभियान के पोस्टर लगे हैं और युवा स्वयंसेवक सक्रिय हैं।इस पहल से सिद्धपुर पर्यटन मानचित्र पर चमकेगा। नदी के किनारे घाट, पार्क और धार्मिक आयोजन संभव होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। अभियान को सोशल मीडिया पर लाखों शुभकामनाएं मिल रही हैं। प्रदीप चावड़ा की नेतृत्व क्षमता और समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा है

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