
मध्य प्रदेश में मौसम इन दिनों पूरी तरह “अनप्रेडिक्टेबल” हो गया है। कभी तेज आंधी, कभी बारिश, तो कहीं ओलावृष्टि—लोगों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर हो क्या रहा है।शनिवार को बैतूल और ग्वालियर में मौसम ने अचानक पलटी मारी। बैतूल के मुलताई में बेर के आकार के बड़े-बड़े ओले गिरे, जिससे सड़कें बर्फ जैसी सफेद दिखने लगीं। ग्वालियर में भी शाम होते-होते तेज बारिश और ओलावृष्टि शुरू हो गई।लेकिन इस बदले मौसम का सबसे खतरनाक पहलू बिजली गिरना रहा। सिवनी और रीवा में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से 4 लोगों की मौत हो गई। इससे गांवों में डर का माहौल बन गया है।अच्छी बात यह रही कि तापमान में गिरावट आई है—कई शहरों में 2 से 7 डिग्री तक पारा नीचे आया है। इससे गर्मी से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।
👉 आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, एक साथ चार सिस्टम एक्टिव हैं—दो साइक्लोनिक सर्कुलेशन और दो टर्फ लाइन। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में लगातार आंधी, बारिश और ओले गिर रहे हैं।
👉 आगे क्या होगा?
- अभी कुछ दिन मौसम ऐसा ही रह सकता है
- लेकिन जैसे ही ये सिस्टम हटेंगे, गर्मी जोरदार वापसी करेगी
- अप्रैल के दूसरे हफ्ते से तापमान तेजी से बढ़ेगा
- महीने के अंत तक कुछ इलाकों में पारा 44–45°C तक पहुंच सकता है
👉 किन इलाकों में ज्यादा असर?
ग्वालियर, धार, खरगोन, बड़वानी, दतिया, मुरैना और श्योपुर जैसे इलाकों में गर्मी ज्यादा पड़ेगी और लू चलने की संभावना है।