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चीन की मध्यस्थता में पाकिस्तान-अफगानिस्तान वार्ता फिर शुरू, तनाव कम करने की कोशिश,

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बार फिर बातचीत की पहल हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने चीन की मध्यस्थता में उत्तरी चीन के उरुमची शहर में मुलाकात की है। इस वार्ता का उद्देश्य दोनों देशों के बीच बढ़ते संघर्ष को कम करना और हालात को स्थिर करना बताया जा रहा है।हालांकि, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की ओर से अभी तक इस बातचीत को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, इस बैठक को औपचारिक मध्यस्थता नहीं बल्कि विचार-विमर्श के रूप में देखा जा रहा है। बैठक का मुख्य उद्देश्य हालिया तनाव पर चर्चा करना और स्थिति को समझना है, न कि किसी बड़े समझौते पर पहुंचना।बताया जा रहा है कि चीन इस प्रक्रिया में विश्वास बहाली के उपायों, जैसे व्यापार मार्गों को फिर से खोलने, पर विशेष जोर दे रहा है। एक अन्य अधिकारी के अनुसार, चीन ने पाकिस्तान की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष पहल की, जबकि अफगानिस्तान ने भी इस बातचीत के लिए बीजिंग से सहयोग मांगा था।यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर तनाव चरम पर है। दोनों देशों के बीच सीमा पर लगातार झड़पें हो रही हैं, जिनमें सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के अंदर किए गए हवाई हमलों में भी बड़ी संख्या में आम नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों की मौत की खबरें सामने आई हैं।पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान सरकार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को शरण दे रही है, जो पाकिस्तान में आतंकी हमलों को अंजाम देता है।

वहीं, अफगान तालिबान इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है और पाकिस्तान पर सीमा उल्लंघन का आरोप लगाता है।इस वार्ता में पाकिस्तान की ओर से विदेश मंत्री इशाक डार के नेतृत्व में राजनयिक, सैन्य और खुफिया अधिकारी शामिल हैं। वहीं अफगानिस्तान की ओर से गृह और विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों के साथ खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी मौजूद हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही इस बैठक से तत्काल कोई बड़ा समाधान न निकले, लेकिन संवाद की शुरुआत अपने आप में एक सकारात्मक संकेत है। यह प्रयास भविष्य में दोनों देशों के बीच स्थायी शांति और सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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