नई दिल्ली, मार्च 2026 — नरेंद्र मोदी की संभावित रूस यात्रा को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण हलचल देखी जा रही है। इस संबंध में आधिकारिक संकेत सर्गेई लावरोव ने दिए हैं, जिन्होंने एक वर्चुअल सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि रूस को 2026 में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे की उम्मीद है।इंडिया एंड रशिया: टुवर्ड्स अ न्यू बाइलेट्रल एजेंडा’ शीर्षक से आयोजित इस सम्मेलन में भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और सशक्त बनाने पर जोर दिया गया। इस अवसर पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी अपने विचार साझा किए और दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों को नई दिशा देने की आवश्यकता पर बल दिया।लावरोव ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और रूस के बीच दशकों पुरानी मित्रता वैश्विक मंच पर एक आदर्श उदाहरण है। उन्होंने कहा कि “उच्चतम स्तर पर होने वाली भरोसेमंद बातचीत किसी भी द्विपक्षीय संबंध की नींव होती है और इसे कम करके नहीं आंका जा सकता।”इस प्रस्तावित यात्रा की पृष्ठभूमि में दिसंबर 2025 में व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूस आने का औपचारिक निमंत्रण दिया था।आगामी यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, प्रौद्योगिकी, लॉजिस्टिक्स और निवेश जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने की संभावना है। विशेष रूप से, वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर भी विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है।भारत और रूस के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी के साथ-साथ रणनीतिक सहयोग भी लगातार गहराता जा रहा है। रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में पहले से ही मजबूत सहयोग मौजूद है, जिसे आगे और विस्तारित किया जा सकता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि वर्ष 2026 में भारत BRICS समूह की अध्यक्षता करेगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय समन्वय और सहयोग को और गति मिलने की संभावना है।प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले अक्टूबर 2024 में कजान में आयोजित 16वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग ले चुके हैं। इसके अतिरिक्त, जुलाई 2024 में उन्होंने रूस की द्विपक्षीय यात्रा भी की थी, जो यूक्रेन संघर्ष के बाद उनकी पहली यात्रा थी। इस यात्रा के दौरान उन्हें रूस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द अपोस्टल’ से सम्मानित किया गया था।भारत और रूस के बीच ‘विजन 2030’ दस्तावेज पर हस्ताक्षर दोनों देशों के दीर्घकालिक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह दस्तावेज आर्थिक, तकनीकी और रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को और सुदृढ़ करने का रोडमैप प्रस्तुत करता है।समग्र रूप से, प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित रूस यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का अवसर प्रदान करेगी, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में भारत-रूस साझेदारी को और अधिक प्रभावशाली बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी।