
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि “कृषक कल्याण वर्ष 2026” के अंतर्गत राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभिन्न विभागों के समन्वय से योजनाओं को धरातल पर तेजी से लागू किया जाएगा, ताकि इसका सीधा लाभ किसानों और उनके परिवारों तक पहुंचे।मुख्यमंत्री डॉ. यादव कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में आयोजित कृषि अभिमुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, राजेन्द्र शुक्ल सहित अनेक मंत्री, जनप्रतिनिधि, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और एफपीओ पदाधिकारी उपस्थित रहे।
किसानों के लिए विशेष पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां किसानों को मात्र 5 रुपये में बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही, शून्य प्रतिशत ब्याज पर फसल ऋण, सौर ऊर्जा योजनाएं और कृषि यंत्रों की उपलब्धता जैसे कदम किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कृषि यंत्रों की दुकानें खोली जाएंगी, जिससे लघु और सीमांत किसानों को किराये पर आधुनिक उपकरण उपलब्ध हो सकें। साथ ही, कृषि विभाग द्वारा प्रति विधानसभा क्षेत्र 5 लाख रुपये की राशि कृषि सम्मेलनों के आयोजन के लिए दी जाएगी।
दुग्ध उत्पादन और पशुपालन पर जोर
प्रदेश में दुग्ध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। वर्तमान में प्रतिदिन 12.50 लाख लीटर दूध संग्रह किया जा रहा है, जिसमें पिछले डेढ़ वर्ष में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दूध के मूल्य में 5 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि से दुग्ध उत्पादकों को सीधा लाभ मिल रहा है।
सिंचाई और कृषि विस्तार
राज्य सरकार ने सिंचाई क्षेत्र को बढ़ाकर 100 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जल संसाधन विभाग द्वारा विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से सिंचाई क्षमता में निरंतर वृद्धि की जा रही है।
कृषि आधारित उद्योग और रोजगार
प्रदेश में कृषि आधारित उद्योगों के विकास के लिए व्यापक संभावनाएं हैं। खाद्य प्रसंस्करण, शहद उत्पादन, मसाला उद्योग और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में 4 हजार से अधिक फूड प्रोसेसिंग इकाइयां कार्यरत हैं और हाल के वर्षों में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
नई योजनाएं और नवाचार
- “माता यशोदा योजना” के तहत स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दूध वितरण की पहल
- एग्रीस्टैक योजना में प्रदेश देश में अग्रणी
- ग्रीष्मकालीन उड़द पर प्रति क्विंटल 600 रुपये बोनस
- केज कल्चर, जैविक खेती और मोटे अनाजों को बढ़ावा
- मछुआ समृद्धि योजना के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान
समग्र विकास का लक्ष्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य की लगभग 60 प्रतिशत आबादी कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। ऐसे में कृषि विकास को प्राथमिकता देना प्रदेश के समग्र आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।उन्होंने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में “कृषक कल्याण वर्ष 2026” महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।