होर्मुज संकट पर अमेरिका को सहयोगियों का सीमित समर्थन, भारत ने अपनाई कूटनीतिक रणनीति,

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कई देशों से इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की गई थी। हालांकि, अमेरिका के कई करीबी सहयोगी देशों ने इस पर सतर्क रुख अपनाया है या सीधे तौर पर इनकार कर दिया है।जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे अमेरिका के महत्वपूर्ण सहयोगियों ने होर्मुज क्षेत्र में अपनी नौसेना भेजने से मना कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया की कैबिनेट मंत्री कैथरीन किंग ने ऑस्ट्रेलियाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (ABC) से बातचीत में कहा कि यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन कैनबरा को इस संबंध में कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है और फिलहाल वहां सैन्य बल भेजने की कोई योजना नहीं है।दक्षिण कोरिया ने भी इस मुद्दे पर सावधानी बरतते हुए कहा है कि वह स्थिति की समीक्षा कर रहा है। सियोल स्थित राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, अमेरिका के साथ चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा और हर कदम उठाने से पहले स्थिति का व्यापक मूल्यांकन किया जाएगा।

दूसरी ओर भारत ने इस संकट के बीच एक अलग कूटनीतिक रास्ता अपनाया है। रिपोर्टों के अनुसार भारत ने ईरान से सीधे बातचीत कर अपने दो तेल टैंकरों के लिए सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित किया है और उन्हें होर्मुज क्षेत्र से निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।इस बीच ब्रिटेन ने फिलहाल सैन्य कदम उठाने के बजाय कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया है। डाउनिंग स्ट्रीट के अनुसार ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत कर वैश्विक शिपिंग पर पड़ रहे प्रभाव को कम करने और जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संभावित उपायों पर चर्चा की है।होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। हालिया संकट के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर अमेरिका को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिल रहा है, जिससे क्षेत्रीय कूटनीति और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े हो रहे हैं।

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