
भारत सरकार ने हाल ही में दो महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों को मंजूरी दी है, जिनमें 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद तथा 6 अतिरिक्त P-8I पोसाइडन समुद्री निगरानी विमानों के अधिग्रहण को हरी झंडी शामिल है। इन फैसलों को भारत की सैन्य क्षमता को आधुनिक और सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र और इंडो-पैसिफिक में बढ़ती रणनीतिक चुनौतियों के बीच यह निर्णय अत्यंत अहम माना जा रहा है।P-8I पोसाइडन, जिसे अमेरिकी कंपनी Boeing Defense, Space & Security ने विकसित किया है, दरअसल Boeing के P-8A विमान का भारतीय संस्करण है। यह एक अत्याधुनिक समुद्री गश्ती और पनडुब्बी रोधी (एंटी-सबमरीन) विमान है, जिसे उसकी क्षमताओं के कारण “सबमरीन हंटर” भी कहा जाता है।भारत ने वर्ष 2009 में आठ P-8I विमानों के लिए पहला समझौता किया था। इसके बाद 2016 में चार और विमानों का ऑर्डर दिया गया। अब हालिया छह विमानों के नए ऑर्डर के साथ भारत, अमेरिका के बाद P-8 पोसाइडन का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर बनने की ओर अग्रसर है। वर्तमान में नौ देशों में लगभग 200 P-8 विमान सेवा में हैं या अनुबंधित हैं, जिनमें जून 2025 तक 169 विमानों की डिलीवरी की जा चुकी है।इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देशों द्वारा P-8 का संचालन सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यह प्लेटफॉर्म क्वाड देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी को बढ़ाता है और रियल-टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही (ISR) डेटा साझा करने में सहायक है। इससे एक नेटवर्क आधारित रक्षा प्रणाली विकसित होती है, जो समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती देती है।P-8I की विशेषता इसकी लंबी दूरी की निगरानी क्षमता है। इसकी अधिकतम रेंज लगभग 1200 नॉटिकल मील है और यह लगातार 10 घंटे तक उड़ान भर सकता है। यह क्षमता इसे हिंद महासागर, मलक्का जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में लंबी अवधि की समुद्री गश्त के लिए उपयुक्त बनाती है।इस विमान में अत्याधुनिक X-बैंड रडार, हाई-रिजॉल्यूशन डिजिटल इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर तथा AN/APY-10 मल्टी-मोड रडार जैसे उपकरण लगे हैं। सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) तकनीक के माध्यम से यह हर मौसम में समुद्र और जमीन दोनों पर लक्ष्यों की पहचान कर सकता है। इसके अतिरिक्त, मैग्नेटिक एनॉमली डिटेक्शन सिस्टम पानी के भीतर मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम है, जो चीन जैसे देशों के बढ़ते सबमरीन फ्लीट की निगरानी में अत्यंत उपयोगी है।
P-8I में 120 से अधिक सोनोबॉय ले जाने की क्षमता है, जो समुद्र के भीतर ध्वनि तरंगों के माध्यम से पनडुब्बियों की गतिविधियों का पता लगाते हैं। यह विमान एयर-टू-सरफेस मिसाइलों और MK-54 टॉरपीडो से लैस है, जिन्हें 30,000 फीट की ऊंचाई से भी तैनात किया जा सकता है। हाई-एल्टीट्यूड एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता इसे आधुनिक समुद्री युद्ध का एक सशक्त उपकरण बनाती है।गौरतलब है कि भारत ने 2017 के डोकलाम गतिरोध और 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के दौरान भी ISR मिशनों में इस विमान का उपयोग किया था। समुद्री भूमिका के अलावा यह विमान जमीन पर खुफिया और निगरानी अभियानों में भी प्रभावी साबित हुआ है।रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, P-8I की बढ़ती संख्या न केवल भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को सुदृढ़ करेगी, बल्कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन पर भी प्रभाव डालेगी। यह कदम भारत की सामरिक तैयारी और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।सरकार का यह निर्णय आत्मनिर्भर और सशक्त रक्षा ढांचे के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में देश को सक्षम बनाएगा।