सरकारी स्लॉटर हाउस सील होने के बाद भी संदिग्ध गतिविधियों पर सवाल

भोपाल — राजधानी भोपाल के सरकारी स्लॉटर हाउस से 26 टन गोमांस मिलने के बाद नगर निगम द्वारा कत्लखाने को सील किए जाने के बावजूद इससे जुड़े विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। स्लॉटर हाउस के संचालन से जुड़े असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा का कथित प्रभाव अब भी क्षेत्र में बना हुआ बताया जा रहा है। स्लॉटर हाउस के सामने स्थित वह भूमि, जिसे नगर निगम द्वारा मेट्रो परियोजना के लिए सौंपा जा चुका है, अब भी उनके कब्जे में होने की चर्चा है।सूत्रों के अनुसार उक्त भूमि पर न केवल भैंसें रखी गई हैं, बल्कि वहां कुछ संदिग्ध गतिविधियां भी जारी रहने की बात सामने आ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीलिंग की कार्रवाई के बाद भी इस क्षेत्र में गतिविधियां पूरी तरह से बंद नहीं हुई हैं, जिससे प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि परिसर में संचालित कई वाहनों पर “नगर निगम भोपाल” लिखा हुआ है, जबकि इन वाहनों का पंजीयन भोपाल के बाहर के शहरों में होना बताया जा रहा है। आरोप है कि इन वाहनों को पीले रंग से रंगकर नगर निगम की गाड़ियों के रूप में प्रस्तुत किया गया और इन्हें शहर में बेखौफ चलाया गया। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि आमजन को भ्रमित करने का भी गंभीर मामला है।स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि मेट्रो परियोजना जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक योजना की भूमि पर अवैध कब्जा और संदिग्ध गतिविधियां किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं। साथ ही, नगर निगम के नाम और पहचान के दुरुपयोग की आशंका प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।नगर निगम और संबंधित विभागों की ओर से अभी तक इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और यदि नियमों का उल्लंघन या फर्जीवाड़ा सामने आता है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। आमजन की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और पारदर्शिता से कदम उठाता है।

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