अखिल गोंडवाना महासभा इंडिया एवं अखिल गोंडवाना गोंडी साहित्य सम्मेलन,

आदिवासी गोंडवाना गोंडी साहित्य‌कारों द्वारा 24, 25 दिसंबर 1948 में ए प्रथम गोडवाना गोडी साहित्य सम्मेलनग्राम सभीति आर्डिनन्स फेक्ट्री भद्रावती सौभाग्य से २५ वा खिला गोड किडी साहित्य सम्मेलनका जिला चन्द्र‌पुर महाराष्ट्र में आयोजन किया गया था। और आयुध निर्माणी (आर्डिनन्स फेक्ट्री) इटारसी खिला होरागाबाद म.प्र. किया गया। में आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में ४ अखिल गोडवाना गोंडी साहित्य के सेक्स राष्ट्रीय संरसक विकमाल शीतल कवडू मरकाम जी (राष्ट्रीय संरक्षक अरिवल गोंड‌वाना महासभा इंडिया तथा अध्यक्षता विरुमाल भरत बाल कोर्राम जी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल गांड बाजा महासभा इंडिया हास एवं स्थानीय भूमका द्वारा प्रकृति शक्ति फढ़ापन गोगो पुप्या अर्चना कर कार्यक्रम की शुभभात भी आयुध, निमर्माणी (आर्डिनेंस फैक्ट्री) इटारसी जिला होशगाबाद (नर्मदापुरम) मन्प्रन्येंकी गयी। तत्पश्चात गौडी साहित्य संवर्धन के केन्द्र बने संतरेगी झेंडे के बीचे रीति रिवाजों का निर्वहन करते हुए गोंडवाना स्टुडेंट युनियन अपनी परंपरागत वेश-भूषा, अपनी संस्कृति को बनाये रखते हुए एवं गोडियन समुदाय के चिरेक एवाचित हुए इस कार्यक्रम में ओडवाना आंदोलन के महान चारस्तंभों के अंतिम स्तंभ मानतीय दादा शीतल कवडू मरकामजी को ९० साल श्रीफल “गोंडवाना रत्न” से सम्मानित किया तथा मरकाम जी धषहा गोंडवाना के आन बान शान उपऔर गोंडवाना केअस्तित्व बचाना यहाँ पर उपस्थित हर एक मातृशक्ति और पितृ‌शक्ति जिम्मेदारी है।कार्यक्रम के अन्तिम दिन गोडी साहित्य सम्मेलन के मुख्य कतिचि तिरुन् के तुलेश्वर हीरा सिंह भरका जी ने कहा गोंडवाना विकास क्रांति के आन्दोलन के चार स्तंभों के छोड़े हुए कार्य को आगेबढ़ाने का संकल्प लिया।

उद्‌बोधन की इस कड़ी श्याम सिंटे मरकाम कने कहा जा कर राज्य का गहन किया पर गोंडी भाषीयों को गोंडवाना राज्य नहीं मिला, तथा दुर्गावती उरके ने अपने उद्‌बोधन में कहा प्यब जिस तरह गारों, खासी, जयन्यिता समुदाय मातृसलीमक व्यवस्था को बनाये रखे और उन्हें छक्वी अनुसूची के तहत अपने धर्म, भाषा, संस्कृति, नियम कानून बनाने का अधिकार मिला तो फिर हम क्यों? इन हमें भी पुनः मातृसतीमक व्यवस्था की ओर पड़ेगा। कार्यक्रम के उप्स पड़ाना में बी. एल कोरीमधी द्वारा अस्मरणीयऐतिहासिक कार्य किये। वर्षों से बिब्ड़े गोंड, कोरकू भाइयों ने अपने-अपने पगडी एक-इसरेको पहनाकर कोरकू समुदाय का स्वागत किया। विरुमाय प्रभादेवी पैदाम को अखिल गोङ्लाना महासभा राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्त किया गया। तथा विभिन्न राज्यों से आये हुये नामाप्पिक चितेको अलग-अलग गतिविधियों के तहत सम्मानित किया गया। गोडवाना गोंडी साहित्य सम्मेलन उपस्थित खंडातेजी (म.रा.) बुद्धदेव श्याम (छ.ग.) बिरु सुझे सिंह टेकामजीरा- संगठन मंत्री भाग-महान् एचएस कुसरेजी ढा. प्रभाकर सिंह उम्र के जी, शिरू सी.एल ठाकुर, परपेती जी, अवध भर्सकोले, सम्भल सिंह मरकाम, सिंहे मरकाम, जय कुमार पर कड़े भान्नद श्यामजी खाराम अहाके, बसंत काकोडिया, सोनू इखनेजी बैतुल, वैशाली धुर्वे सहित, जयराम धुर्वे, बाबूलाल धुर्वे सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।

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