
तुर्की अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए लगातार विकल्प तलाश रहा है। पहले उसने अमेरिका से F-35 लड़ाकू विमान खरीदने की कोशिशें की थीं, लेकिन राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मनाने की कोशिशें विफल रहीं। इसके बाद तुर्की ने यूरोफाइटर टाइफून विमान खरीदने का प्रयास किया। हालांकि, जर्मनी के विरोध के चलते नए विमान खरीदने का सौदा भी अटक गया। अब एर्दोगन सेकेंड हैंड यूरोफाइटर टाइफून खरीदने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
सेकेंड हैंड विमान क्यों?
मिडिल ईस्ट आई (MEE) की रिपोर्ट के मुताबिक, तुर्की इस समय कतर के साथ सेकेंड हैंड यूरोफाइटर टाइफून जेट खरीदने पर बातचीत कर रहा है। दरअसल, तुर्की की वायुसेना के पास मौजूद F-16 बेड़ा तेजी से पुराना हो रहा है और उसे अपग्रेड करने की जरूरत है। वहीं, तुर्की का स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान KAAN 2030 से पहले वायुसेना में शामिल नहीं हो सकेगा। ऐसे में अगले पांच वर्षों के अंतराल को भरने के लिए तुर्की वैकल्पिक विमानों पर दांव लगा रहा है।
पृष्ठभूमि
2019 में रूस निर्मित एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की खरीद के बाद अमेरिका ने तुर्की को F-35 कार्यक्रम से बाहर कर दिया था। इसके चलते अंकारा को आधुनिक लड़ाकू विमानों की गंभीर कमी का सामना करना पड़ रहा है। यही वजह है कि अब तुर्की सेकेंड हैंड विमानों को भी संभावित समाधान के रूप में देख रहा है।
मौजूदा स्थिति
हाल ही में तुर्की रक्षा मंत्रालय और कतर अधिकारियों की बैठक के बाद कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के बीच इस समझौते पर चर्चाएं जारी हैं। MEE ने भी इस पर टिप्पणी के लिए तुर्की सरकार से संपर्क किया है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।