
लगातार हो रही भारी बारिश ने हिमालयी क्षेत्रों में तबाही मचा दी है। भूस्खलन और बाढ़ से अब तक 36 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें से 33 लोगों की जान वैष्णो देवी के पास हुए एक भीषण भूस्खलन में गई है। कई गांवों का संपर्क टूट गया है और राहत-बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं।
वैष्णो देवी मार्ग पर सबसे बड़ा हादसा
कटरा से वैष्णो देवी धाम तक जाने वाले मार्ग पर भारी भूस्खलन के चलते कई तीर्थयात्री मलबे में दब गए। प्रशासन ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और एनडीआरएफ की टीमें राहत कार्य में जुटी हैं। अब तक कई लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, लेकिन कई लापता बताए जा रहे हैं।
पड़ोसी पाकिस्तान में भी संकट
भारी मानसून का असर भारत के साथ-साथ पाकिस्तान में भी देखा जा रहा है। वहां कई निचले इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। प्रशासन के अनुसार लाखों लोग विस्थापित हुए हैं और कई गांव जलमग्न हो गए हैं।
सड़कें और पुल ध्वस्त, चेतावनी जारी
हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में कई जगहों पर सड़कों और पुलों को भारी नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों के लिए भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों को नदी-नालों के किनारे जाने से बचने की सलाह दी है।
जलवायु परिवर्तन को ठहराया जिम्मेदार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की भीषण बारिश और भूस्खलन जलवायु परिवर्तन और असंतुलित विकास का परिणाम हैं। पहाड़ी इलाकों में अनियोजित निर्माण और वनों की कटाई से आपदा का खतरा और बढ़ जाता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और राहत कार्य
केंद्र और राज्य सरकारों ने संयुक्त रूप से राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। हेलीकॉप्टरों से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। प्रधानमंत्री ने मृतकों के प्रति संवेदना व्यक्त की और प्रभावित परिवारों को हरसंभव मदद देने का आश्वासन दिया।