
पाकिस्तान ने सूडान की सैन्य सरकार के साथ 1.5 अरब डॉलर मूल्य का हथियार सौदा अंतिम रूप दे दिया है। यह डील ऐसे समय पर हुई है जब सूडान पहले से ही गृहयुद्ध की विभीषिका झेल रहा है, और इससे अफ्रीका के लाल सागर गलियारे में इस्लामी धुरी राष्ट्रों के प्रभाव एवं संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।सूत्रों के अनुसार, इस समझौते के तहत पाकिस्तान, सूडान के सशस्त्र बलों (SAF) को आधुनिक हथियारों और रक्षा प्रणालियों की एक बड़ी खेप उपलब्ध कराएगा। इन सशस्त्र बलों के मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थित मिलिशिया से करीबी संबंध बताए जाते हैं।
इस हथियार सौदे में शामिल प्रमुख हथियार और प्रणालियां हैं:
- 10 K-8 कराकोरम हल्के अटैक एयरक्राफ्ट
- मिग-21 इंजन
- शहपर-II, YIHA-III, MR-10K और अबाबील-5 ड्रोन सिस्टम
- 150 मोहाफिज बख्तरबंद गाड़ियां
- HQ-6/9 एयर डिफेंस सिस्टम
पाकिस्तान ने इस सौदे को अपनी खराब आर्थिक स्थिति सुधारने के प्रयास के रूप में पेश किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यह डील वास्तव में चीन की अफ्रीका स्ट्रेटेजी का हिस्सा है। इसमें पाकिस्तान केवल एक "फ्रंट सप्लायर" के रूप में काम कर रहा है, जबकि असल नियंत्रण और रणनीतिक योजना बीजिंग के हाथों में है।लाल सागर गलियारा, अफ्रीका और मध्य पूर्व के बीच एक महत्वपूर्ण समुद्री वाणिज्यिक और सामरिक मार्ग है। इस क्षेत्र में पहले से ही यमन, सोमालिया और सूडान के चलते सुरक्षा अस्थिरता बनी हुई है। पाकिस्तान–सूडान हथियार सौदा इस अस्थिरता को और गहरा कर सकता है तथा क्षेत्रीय संघर्षों में इस्लामी धुरी राष्ट्रों के लिए नए युद्धक्षेत्र खोल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह सौदा अफ्रीका में एक नए शस्त्र दौड़ को जन्म दे सकता है, जिससे न केवल सूडान के गृहयुद्ध की जटिलताएं बढ़ेंगी, बल्कि पड़ोसी देशों की सुरक्षा और स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है। साथ ही, यह अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति स्थापना प्रयासों के विरुद्ध एक कदम माना जा रहा है, क्योंकि सूडान वर्तमान में गंभीर मानवीय संकट और संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के दौर से गुजर रहा है।अंतरराष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अफ्रीकी संघ, इस डील पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं। उम्मीद है कि आने वाले हफ्तों में इस हथियार सौदे के असर को लेकर राजनयिक और आर्थिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।