

भोपाल। लेखक, चितक और विचारक संजय अग्रवाल की नई कृति 365° पाठकों के समक्ष प्रस्तुत की गई है। यह पुस्तक ‘आज का चिंतन’ विचार श्रृंखला पर आधारित है, जिसे संजय अग्रवाल विगत आठ-दस माह से नियमित रूप से लिखते आ रहे हैं। उनकी यह श्रृंखला संपर्क और संवाद समूह सहित व्यक्तिगत स्तर पर भी पाठकों तक पहुँचती रही है और अब पुस्तक रूप में संकलित होकर नए आयाम प्राप्त कर रही है।पुस्तक की भूमिका में संपादक ने अपने अनुभव साझा करते हुए लिखा है कि नियमित रूप से मौलिक चिंतन करना और उसे शब्दों में समेटना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य है। लेकिन संजय अग्रवाल ने इसे सहजता से संभव किया है। उन्होंने इस विचार श्रृंखला को ‘ज्ञान के मोतियों की माला’ बताते हुए कहा कि इसे पिरोने का अवसर पाकर वे स्वयं को सौभाग्यशाली मानते हैं।365° को तीन खंडों में विभाजित किया गया है। पहले खंड में यह बताया गया है कि हमें लोगों से व्यवहार कैसा करना चाहिए। दूसरे खंड में यह स्पष्ट किया गया है कि छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देने से जीवन में बड़े बदलाव कैसे संभव हो सकते हैं। तीसरे खंड में जीवन, संसार, प्रकृति, संबंधों और भावनाओं पर आधारित गहन और तटस्थ चिंतन प्रस्तुत किया गया है।

पुस्तक में संकलित विचारों को लेखक ने शब्दों की ऊर्जा से सजाया है। उनका मानना है कि शब्द केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि परिवर्तन की शक्ति भी हैं। यदि इनका सही उपयोग हो, तो यह व्यक्तिगत जीवन से लेकर पूरी दुनिया को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।365° केवल विचारों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उत्कृष्टता की ओर निरंतर बढ़ने का संदेश भी देती है। यह पाठकों को यह अनुभव कराती है कि सम्पूर्णता भले ही कठिन हो, लेकिन उत्कृष्टता की राह हमेशा खुली रहती है।इस अवसर पर साहित्यप्रेमियों और चिंतनशील पाठकों ने कहा कि यह पुस्तक न केवल पढ़ने योग्य है, बल्कि जीवन को देखने और समझने का एक नया दृष्टिकोण भी प्रदान करती है।