
नई दिल्ली, 8 अगस्त 2025 – हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूसी तेल खरीदने को लेकर भारत के खिलाफ टैरिफ युद्ध छेड़ने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। ट्रंप प्रशासन ने भारत के कुछ निर्यातित उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इस कदम से भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में नई चुनौतियां उत्पन्न हो गई हैं।ऐसे कठिन समय में भारत के पुराने मित्र ईरान ने खुलकर समर्थन का आश्वासन दिया है। भारत में ईरान के राजदूत डॉ. इराज इलाही ने द पायनियर अखबार को दिए साक्षात्कार में कहा कि तेहरान, नई दिल्ली के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को और मज़बूत करना चाहता है। उन्होंने भारत से अपील की कि वह एक बार फिर से ईरान से तेल आयात शुरू करे और रणनीतिक महत्व के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करे।राजदूत इलाही ने कहा कि भारत और ईरान के बीच सहयोग बढ़ाने का एक प्रभावी माध्यम ब्रिक्स मंच हो सकता है। उनके अनुसार, ब्रिक्स एक सशक्त बहुपक्षीय फोरम है, जहां भारत और ईरान मिलकर अमेरिकी टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठा सकते हैं। उन्होंने विशेष रूप से सुझाव दिया कि द्विपक्षीय व्यापार में स्थानीय मुद्राओं का उपयोग किया जाए, जिससे अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटे और आर्थिक प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो।
इलाही ने जोर देकर कहा कि 21वीं सदी एशिया की सदी है और भारत व ईरान इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी न केवल दोनों देशों के आर्थिक हितों के लिए लाभकारी होगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और विकास में भी योगदान देगी।ईरान ने भारत को आश्वस्त किया है कि वह ऊर्जा आपूर्ति और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग के लिए तैयार है। इस समर्थन के साथ, भारत के पास अमेरिकी टैरिफ दबाव से निपटने के लिए एक संभावित विकल्प मौजूद है, जो दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत कर सकता है।