नए चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। जिसके बाद अब वो देश के 51 वें चीफ जस्टिस बन गए हैं। चीफ जस्टिस संजीव खन्ना के खून में ही वकालत है। दरअसल उनके पिता देवराज खन्ना दिल्ली हाई कोर्ट के जज रहे हैं जबकि उनके चाचा हंसराज खन्ना सुप्रीम कोर्ट के जज थे। उन्होंने भी इसी दिशा में अपना करियर बनाने की ठानी और 1983 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की।उसके बाद साल 2005 में वो दिल्ली हाईकोर्ट के जज बन गए। हाई कोर्ट के जज से सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस बनने के इस सफर में उन्होंने कई मामलों में सुनवाई की और कुछ अहम फैसले भी लिए।

यह फैसला पारदर्शिता और भ्रष्टाचार की संभावना चिंताओं के कारण लिया गया था। जस्टिस खन्ना ने इस तर्क को खारिज कर दिया कि बैंकिंग चैनलों के माध्यम से किए गए दान पर दाता की गोपनीयता लागू होती है। उन्होंने कहा कि बॉन्ड को संभालने वाले बैंक अधिकारियों को दानदाताओं की पहचान के बारे में पता होता है।