चाबहार पर अमेरिकी पाबंदी और बांग्लादेश में सैन्य गतिविधि से भारत की चिंता बढ़ी,

भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय अमेरिका द्वारा ईरान के चाबहार पोर्ट पर दी गई छूट को हटाने का ऐलान है। यह बंदरगाह भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँचने का महत्वपूर्ण मार्ग है, जो पाकिस्तान को बाईपास करता है। पिछले वर्ष भारत ने चाबहार पोर्ट के विकास और संचालन के अधिकार दस वर्षों के लिए प्राप्त किए थे। अब अमेरिकी पाबंदियों से भारत की आर्थिक और सामरिक योजनाएँ प्रभावित हो सकती हैं और अफगानिस्तान व मध्य एशिया में उसकी रणनीतिक पहुँच सीमित हो सकती है।विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के निर्णयों ने भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव बढ़ा दिया है। भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ, H1B वीज़ा पर बढ़ी हुई फीस और अब चाबहार पर पाबंदी—इन सबने भारत को मुश्किल स्थिति में ला खड़ा किया है।इसी बीच भारत के लिए एक और चिंता का कारण बांग्लादेश बना है। अमेरिकी वायुसेना का C-130J सुपर हरक्यूलिस एयरक्राफ्ट हाल ही में चटगांव स्थित शाह अमानत अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा। यह ऐसे समय हुआ जब अमेरिका, बांग्लादेश और श्रीलंका ने बांग्लादेश वायु सेना के जहुरुल हक अड्डे पर ऑपरेशन पैसिफिक एंजेल 25-3 अभ्यास शुरू किया है।

चटगांव भारत-म्यांमार सीमा के नजदीक है और रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। इससे पहले भी अमेरिका और बांग्लादेश ने सिलहट में टाइगर लाइटनिंग 2025 सैन्य अभ्यास किया था। बांग्लादेश में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों की बढ़ोतरी से भारत की सामरिक चिंताएँ और गहरी हो रही हैं।

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