डोनाल्ड ट्रंप का नया प्रशासन क्षेत्रीय प्रॉक्सी को फंडिंग और परमाणु हथियार बनाने की ईरान की क्षमता को ‘दिवालिया’ करने के लिए ‘अधिकतम दबाव’ की नीति पर काम करने का विकल्प चुनने जा रहा है। फाइनेंशियल टाइम्स ने ट्रंप के नए एडमिनिस्ट्रेशन से परिचित सूत्रों के हवाले से ये दावा किया है।इसमें महत्वपूर्ण तेल निर्यात भी शामिल है। एक सूत्र ने कहा कि ट्रंप जल्द से जल्द ईरान को ‘दिवालिया’ बनाने के लिए बहुत ज्यादा दबाव की रणनीति को फिर से लागू करने के लिए दृढ़ हैं। यह पश्चिम एशिया में अमेरिकी विदेश नीति में बदलाव को दिखाएगी।ट्रंप की एक और नीति ईरान को अपनी सेना बनाने या क्षेत्र में प्रॉक्सी समूहों को निधि देने के लिए राजस्व से वंचित करना है। इसमें ईरान पर दबाव बनाकर उसे नए परमाणु समझौते पर बातचीत करने और अपनी क्षेत्रीय नीतियों को बदलने के लिए राजी करना है। हालांकि इसकी सफलता पर अभी कई तरह के सवाल बाकी हैं।

कंसल्टेंसी रैपिडन एनर्जी के अध्यक्ष और जॉर्ज डब्ल्यू बुश प्रशासन के पूर्व ऊर्जा सलाहकार बॉब मैकनेली का कहना है कि तेल ईरान की आय का मुख्य स्रोत है। ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही नाजुक हालात में है। ईरान पर प्रतिबंध लगे तो ईरान के लिए मुश्किल खड़ी हो सकती है। इससे वह घुटनों पर आ सकता है।