
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि कला और साहित्य मन को आत्मिक अनुभूति प्रदान करते हैं तथा अंतर्मन को प्रसन्नता और सुकून से भर देते हैं। साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से न केवल समकालीन समाज की विसंगतियों को उजागर करते हैं, बल्कि भावी पीढ़ियों को दिशा और दृष्टि भी देते हैं। वे समाज और देश की सच्ची सेवा करते हैं और उनका सम्मान वस्तुतः देश का सम्मान होता है।राज्यपाल श्री पटेल मंगलवार को दुष्यन्त कुमार स्मारक पाण्डुलिपि संग्रहालय, भोपाल के स्थापना पर्व के अवसर पर आयोजित दुष्यन्त शोध केन्द्र के उद्घाटन एवं अलंकरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने वरिष्ठ साहित्यकार श्री उदयप्रकाश को राष्ट्रीय दुष्यन्त अलंकरण सम्मान–2025 से सम्मानित किया। इसके साथ ही श्रीमती कांति शुक्ला को दुष्यन्त सुदीर्घ साहित्य साधना सम्मान–2025 तथा डॉ. बहादुर सिंह को दुष्यन्त आंचलिक भाषा सम्मान–2025 प्रदान किया गया। राज्यपाल श्री पटेल ने साहित्यकार श्री अरुण तिवारी, श्री जवाहर कर्नाट एवं श्री विजय वाजपेयी को भी सम्मानित कर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।राज्यपाल ने कहा कि स्थापना पर्व के अवसर पर साहित्य सेवियों का सम्मान केवल किसी संस्थान का उत्सव नहीं, बल्कि हिंदी साहित्य की जीवंत परंपरा का उत्सव है। यह आयोजन इसलिए भी विशिष्ट है क्योंकि आज उन रचनाकारों को सम्मानित किया जा रहा है, जिन्होंने अपनी लेखनी से भाषा, समाज और संवेदना को समृद्ध किया है तथा महान साहित्यकार दुष्यन्त कुमार की वैचारिक विरासत को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि समाज का दर्पण और हमारी सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रमाण होता है।राज्यपाल श्री पटेल ने दुष्यन्त कुमार के साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि वे ऐसे रचनाकार थे जिन्होंने जन-सरोकारों से जुड़ी रचनाओं के माध्यम से आम आदमी की पीड़ा, उसकी आकांक्षाओं और संघर्षों को अत्यंत सशक्त स्वर दिया। उनकी रचनाएँ केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी अपने समय में थीं।उन्होंने कहा कि साहित्य को केवल मनोरंजन का साधन न मानकर समाज के परिष्कार का माध्यम बनाना होगा। क्षेत्रीय भाषाओं, बोलियों और लोक कलाओं में बसी माटी की सुगंध तथा लोक की धड़कन को साहित्य में स्थान देना समय की आवश्यकता है। साहित्य साधकों को प्राचीन विरासत और आधुनिक नवाचार के बीच एक सशक्त सेतु बनकर आगे आना होगा, ताकि परंपरा और प्रगति दोनों साथ-साथ चल सकें।
कार्यक्रम का शुभारंभ राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल द्वारा माँ सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। उन्होंने दुष्यन्त शोध केन्द्र का उद्घाटन किया और संग्रहालय का अवलोकन भी किया। राज्यपाल का पुष्पगुच्छ से स्वागत कर स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। इस अवसर पर संग्रहालय की पत्रिका “प्रेरणा” के विशेषांक का भी लोकार्पण किया गया।कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संग्रहालय की सचिव श्रीमती करूणा राजुरकर ने दिया। विश्वरंग के निदेशक श्री संतोष चौबे ने हिन्दी गजल के प्रणेता दुष्यन्त कुमार का पुण्य स्मरण किया तथा सभी सम्मानित साहित्यकारों को बधाई दी। उन्होंने राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के सिकल सेल जागरूकता के प्रयासों की भी सराहना की। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती विशाखा ने किया तथा आभार प्रदर्शन संग्रहालय के अध्यक्ष श्री रामराव वामनकर ने किया। कार्यक्रम में संग्रहालय के सदस्य, साहित्यकार एवं बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।