
सुंदर नगरी स्थित एक सरकारी स्कूल में शिक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर का ऑफिस शिफ्ट किए जाने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने शिक्षा प्राधिकारी को निर्देश दिया है कि स्कूली बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए तत्काल सर्वे कर आवश्यक कदम उठाए जाएं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने 3 सितंबर को जारी आदेश में कहा कि जहां तक ऑफिस को शिफ्ट करने के निर्णय का प्रश्न है, उसमें दखल देने का कोई ठोस कारण नहीं दिखता। हालांकि, याचिकाकर्ता द्वारा उठाई गई सुरक्षा और पढ़ाई के अनुकूल वातावरण की चिंता वाजिब है और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने कहा कि शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह स्थानांतरण प्रक्रिया से पहले और बाद में यह सुनिश्चित करे कि स्कूल में पढ़ रहे बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा, भीड़भाड़ या सुरक्षा संबंधी समस्या का सामना न करना पड़े। साथ ही, पढ़ाई के वातावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए।
न्यायालय ने निर्देश दिए कि संबंधित स्थल का विस्तृत सर्वेक्षण कर एक रिपोर्ट तैयार की जाए और बच्चों की सुरक्षा, पढ़ाई की सुविधा एवं समग्र शैक्षिक माहौल को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया जाए।
यह मामला उस समय सामने आया जब याचिकाकर्ता ने चिंता जताई कि स्कूल परिसर में डिप्टी डायरेक्टर के ऑफिस को स्थानांतरित करने से बच्चों की सुरक्षा और अध्ययन में बाधा उत्पन्न हो सकती है। कोर्ट ने इस संदर्भ में कहा कि शिक्षा विभाग को अपने फैसले में छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखना होगा।