मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के बीच तेजी से बढ़ते बिलों और स्मार्ट मीटर की अनिवार्य स्थापना को लेकर जारी नाराजगी के बीच पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसे गरीब और मध्यमवर्गीय उपभोक्ताओं पर थोपा गया अन्यायपूर्ण निर्णय करार देते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर योजना आम जनता का आर्थिक शोषण कर रही है।कमलनाथ ने भोपाल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पहले जिन घरों में बिजली बिल 300 से 600 रुपये तक आता था, अब वही उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगने के बाद 6,000 से 20,000 रुपये तक के बिल भरने को मजबूर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिजली की खपत उतनी ही है तो अचानक इतना बड़ा अंतर क्यों आ रहा है? उन्होंने दावा किया कि बिजली कंपनियां जानबूझकर इन मीटरों की स्पीड तेज कर रही हैं और जनता को लूटने का काम कर रही हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि स्मार्ट मीटर योजना का उद्देश्य पारदर्शिता और आधुनिक सुविधा देना बताया गया था, लेकिन हकीकत में यह योजना आमजन पर बोझ बन गई है। कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि मीटर लगाने के बाद बिना ज्यादा बिजली इस्तेमाल किए भी बिल कई गुना बढ़ गया। इससे मध्यमवर्ग और गरीब परिवारों पर गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।कमलनाथ ने सरकार से तुरंत इस योजना की समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर बिजली कंपनियों को नियंत्रण में नहीं रखा गया तो आने वाले समय में हालात और खराब होंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि कांग्रेस जनता के साथ खड़ी है और यदि इस अन्याय को नहीं रोका गया तो कांग्रेस सड़क पर उतरकर जनआंदोलन करेगी।उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार बिजली कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए उपभोक्ताओं को नुकसान पहुंचा रही है। स्मार्ट मीटर के नाम पर कंपनियों को करोड़ों रुपये का फायदा हो रहा है, जबकि जनता महंगे बिलों का बोझ झेल रही है। उन्होंने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री थे, तब बिजली बिलों को आधा कर राहत दी गई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने बिजली को महंगा कर दिया है।
कमलनाथ ने कहा कि कांग्रेस शासन में किसानों, मजदूरों और आम परिवारों को सस्ती बिजली देने की नीति अपनाई गई थी, लेकिन आज किसान और आम उपभोक्ता महंगे बिलों से परेशान हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार गरीबों और किसानों को राहत देने के बजाय क्यों कॉर्पोरेट कंपनियों के हित में फैसले ले रही है।अंत में कमलनाथ ने राज्य सरकार को अल्टीमेटम दिया कि स्मार्ट मीटर से जुड़े सभी बिलों की जांच करवाई जाए और जहां उपभोक्ताओं से अधिक वसूली हुई है, उसे तुरंत वापस किया जाए। साथ ही, स्मार्ट मीटर लगाने की बाध्यता को समाप्त कर उपभोक्ताओं को पुराने मीटर रखने का विकल्प दिया जाए।उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस मुद्दे पर गंभीर नहीं हुई तो कांग्रेस जनहित में बड़ा आंदोलन करेगी और जनता को न्याय दिलाने के लिए सड़क से विधानसभा तक संघर्ष करेगी।