सभी नए मोबाइल फोनों में ‘संचार साथी’ ऐप अनिवार्य: दूरसंचार विभाग का बड़ा आदेश,

दूरसंचार विभाग (DoT) ने देश की सभी मोबाइल फोन निर्माता एवं आयातक कंपनियों को बड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब भारत में बनने या आयात होकर आने वाले सभी नए स्मार्टफोन्स में ‘संचार साथी’ मोबाइल एप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा। यह निर्णय मोबाइल सुरक्षा, साइबर धोखाधड़ी नियंत्रण और उपभोक्ता संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है। 28 नवंबर को जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार कंपनियों को यह नियम लागू करने के लिए 90 दिनों का समय दिया गया है।सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सार्वभौमिक रूप से सभी ब्रांडों पर लागू होगा—चाहे वह एपल, सैमसंग, गूगल, शाओमी, वीवो, ओप्पो या कोई अन्य कंपनी हो। 90 दिनों की अवधि के बाद भारत में निर्मित या आयात किए जाने वाले किसी भी नए स्मार्टफोन में ‘संचार साथी’ एप पहले से इंस्टॉल होना अनिवार्य होगा और इसे न हटाया जा सकेगा, न ही डिसेबल किया जा सकेगा। यह भी सुनिश्चित किया जाना है कि फोन सेटअप प्रक्रिया के दौरान यह एप आसानी से दिखाई दे और उपयोगकर्ता इसे बिना किसी कठिनाई के एक्सेस कर सकें।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह आदेश सिर्फ नए फोन तक सीमित नहीं रहेगा। सभी उन मोबाइल फोनों पर भी ‘संचार साथी’ एप उपलब्ध कराना आवश्यक होगा जो पहले से निर्मित हैं या स्टोर्स में बिक्री के लिए मौजूद हैं।इसके लिए कंपनियों को सॉफ़्टवेयर अपडेट के जरिए ‘संचार साथी’ एप जोड़ना होगा।निर्माताओं और आयातकों को इस आदेश के अनुपालन की 120 दिनों के भीतर रिपोर्ट दूरसंचार विभाग में जमा करनी अनिवार्य होगी। अनुपालन सुनिश्चित न करने पर विभाग दूरसंचार अधिनियम 2023 और दूरसंचार साइबर सुरक्षा नियम 2024 के तहत कार्रवाई कर सकेगा।


क्यों अनिवार्य हुआ ‘संचार साथी’ एप?

‘संचार साथी’ एप मोबाइल सुरक्षा, IMEI सत्यापन और साइबर अपराध रोकथाम के लिए तैयार किया गया एक महत्वपूर्ण डिजिटल उपकरण है। सरकार के अनुसार, भारत में बढ़ते मोबाइल फ्रॉड, फर्जी IMEI नंबर, फिशिंग कॉल और साइबर धोखाधड़ी के मामलों को देखते हुए यह एप अनिवार्य बनाना जरूरी था।

एप के प्रमुख लाभ:

  • मोबाइल के IMEI नंबर की जांच
  • IMEI संबंधित फर्जीवाड़े की शिकायत दर्ज करने की सुविधा
  • खोए या चोरी हुए मोबाइल की रिपोर्ट दर्ज करने का विकल्प
  • धोखाधड़ी वाली कॉल, फर्जी नंबर और साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज करने की सुविधा

सरकार ने दोहराया है कि IMEI से छेड़छाड़ करना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। दूरसंचार अधिनियम 2023 के अनुसार इसके लिए 3 साल की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।DoT ने मोबाइल कंपनियों को स्पष्ट किया है कि ‘संचार साथी’ एप को फोन में न तो छुपाया जाए और न ही इसकी किसी सुविधा को डिसेबल किया जाए। उपयोगकर्ता को एप तक सीधी और सरल पहुंच मिलनी चाहिए ताकि वह सुरक्षा से जुड़े मामलों में तुरंत कदम उठा सके।


ऐप-आधारित सेवाओं पर भी सरकार सख्त

मोबाइल सुरक्षा के क्षेत्र में यह DoT का दूसरा बड़ा कदम है। इससे पहले सरकार ने वॉट्सऐप, सिग्नल, टेलीग्राम जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी नए नियम लागू किए थे। इन नियमों का उद्देश्य पहचान सत्यापन, दुरुपयोग नियंत्रण और साइबर सुरक्षा को और मजबूत करना है।


नए नियम क्या कहते हैं?

सरकार द्वारा हाल ही में किए गए प्रावधानों में निम्न प्रमुख बिंदु शामिल हैं:

  • सभी मैसेजिंग एप्स को यूज़र के एक्टिव सिम कार्ड से हमेशा लिंक्ड रहना अनिवार्य होगा।
  • एप का वेब वर्जन (जैसे WhatsApp Web) हर 6 घंटे में स्वतः लॉगआउट हो जाएगा।
  • पुनः लॉगिन के लिए उपयोगकर्ता को QR कोड स्कैन कर डिवाइस को फिर से लिंक करना होगा।
  • इन कंपनियों को भी 120 दिनों के भीतर ऑडिट रिपोर्ट जमा करनी होगी।

सरकार का मानना है कि इन कदमों से फर्जी अकाउंट्स, अनधिकृत एक्सेस, डिजिटल फ्रॉड और साइबर अपराध को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।


सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता

दूरसंचार विभाग ने कहा है कि भारत में मोबाइल उपयोगकर्ताओं की संख्या बड़ी तेजी से बढ़ रही है, और इसके साथ ही साइबर अपराध के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में उपयोगकर्ताओं की पहचान सत्यापन, फोन ट्रैकिंग, फर्जीवाड़ा रोकथाम और शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए तकनीकी उपाय जरूरी हैं।संचार साथी’ एप को अनिवार्य बनाना इसी दिशा में सरकार का एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल मोबाइल सुरक्षा मजबूत होगी बल्कि देश में डिजिटल संचार तंत्र को अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने में भी सहायता मिलेगी।

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