सूडान संघर्ष को लेकर सऊदी अरब–यूएई रिश्तों में बढ़ता तनाव,

पिछले महीने अमेरिका दौरे पर गए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान (MBZ) के बीच बढ़ते तनाव ने खाड़ी क्षेत्र की भू-राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। वाशिंगटन यात्रा के दौरान क्राउन प्रिंस MBS ने कथित तौर पर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से शिकायत की कि यूएई सूडान के विवादग्रस्त पैरामिलिट्री संगठन, रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है, जिसकी वजह से सूडान में हो रही हिंसा और लगातार बढ़ती मौतों के लिए UAE जिम्मेदार है।MBS का यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मतभेदों को सतह पर ले आया है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी क्राउन प्रिंस ने ट्रंप से यूएई पर दबाव बनाने का आग्रह किया, ताकि अबू धाबी सूडान में किसी भी सैन्य संलिप्तता से पीछे हटे। गौरतलब है कि अप्रैल 2023 में सूडान में शुरू हुए संघर्ष में सऊदी अरब ने शुरू में सरकारी सूडानी सेना (SAF) का समर्थन किया था, जबकि यूएई RSF के पक्ष में खड़ा नजर आया। यह टकराव न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति का मुद्दा बन गया, बल्कि सूडान में मानवीय संकट को भी और गहरा कर गया। लाखों लोग अपने घरों से बेघर हुए हैं और संघर्ष दुनिया के सबसे खतरनाक युद्धों में शामिल हो चुका है।यूएई ने हर स्तर पर सूडान में सैन्य हस्तक्षेप से इनकार किया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और कई सबूतों से यह संकेत मिला है कि RSF को भारी मात्रा में हथियार, सैन्य उपकरण और रसद सहायता प्राप्त हो रही है। इन आरोपों से सऊदी-यूएई संबंधों में मौजूद दरार और चौड़ी होती दिख रही है। सऊदी अरब अब खुद को मध्यस्थ की भूमिका में पेश कर रहा है, जबकि यूएई की कथित सैन्य भागीदारी क्षेत्र में नई शक्ति-संतुलन की बहस छेड़ रही है।

एक समय ऐसा भी था जब MBS और MBZ के संबंध बेहद मजबूत माने जाते थे। 2015 में MBS जब सऊदी अरब के रक्षा मंत्री बने, तब MBZ उन्हें एक संभावनाशील युवा नेता के रूप में देखते थे और खाड़ी क्षेत्र में नई रणनीति को साथ मिलकर आगे बढ़ाने की कोशिशें तेज थीं। 2018 के बाद यमन युद्ध, क्षेत्रीय कूटनीति और आर्थिक साझेदारियों में दोनों देशों ने कई सफल सहयोग किए। लेकिन इसी अवधि में कई बार दोनों देशों के रुख में अंतर साफ नजर आया।यमन युद्ध की रणनीति, तेल उत्पादन नीति और क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ाने की महत्वाकांक्षा जैसे मुद्दों पर समय-समय पर मतभेद उभरे। हालांकि दोनों देशों ने हमेशा इन्हें कूटनीतिक तरीकों से सुलझाने की कोशिश की और सार्वजनिक रूप से विवाद को बढ़ावा नहीं दिया। लेकिन सूडान संघर्ष से जुड़े नए आरोपों ने यह संकेत दे दिया है कि MBS–MBZ के संबंध पहले जैसे नहीं रहे।विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब अब वैश्विक स्तर पर अपनी स्वतंत्र नीति को बढ़ावा दे रहा है, जबकि UAE तेजी से क्षेत्रीय शक्ति बनने की कोशिश कर रहा है। दोनों देशों की विदेश नीतियाँ अब पहले की तरह समान दिशा में नहीं चल रही हैं। सूडान को लेकर अलग-अलग रणनीतियाँ इस दूरी को और गहराने का काम कर रही हैं।सूडान में लगातार बढ़ती हिंसा और मानवीय संकट को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों खाड़ी देशों से संयम और समन्वय की अपील कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर सऊदी और यूएई अपने आपसी मतभेदों को समय रहते हल नहीं कर पाए, तो खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता और क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।सऊदी–यूएई रिश्तों में यह तनाव आने वाले दिनों में खाड़ी राजनीति का अहम मुद्दा बना रहेगा। दोनों देशों के कदम न केवल सूडान की स्थिति को प्रभावित करेंगे, बल्कि वैश्विक कूटनीतिक संतुलन पर भी इसका असर पड़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *