
सऊदी अरब में काम कर रहे और रह रहे विदेशी नागरिकों में पाकिस्तानी नागरिकों की स्थिति पिछले एक दशक से लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि बीते दस वर्षों में सऊदी अरब में गिरफ्तार होने, मुकदमों का सामना करने और मृत्युदंड पाने वाले विदेशी नागरिकों में पाकिस्तानी नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है। पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार जाहिद गिश्कोरी द्वारा जारी एक विस्तृत वीडियो रिपोर्ट में इस गंभीर मानवीय संकट का खुलासा किया गया है, जिसने दोनों देशों के संबंधों और पाकिस्तानी प्रवासी समुदाय की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।जाहिद गिश्कोरी द्वारा साझा की गई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2014 के बाद से अब तक (लगभग दस वर्षों में) 170 पाकिस्तानी नागरिकों को सऊदी अरब में मृत्युदंड दिया जा चुका है। ये सज़ाएं मुख्यतः हत्या, ड्रग ट्रैफिकिंग और अन्य गंभीर अपराधों से जुड़ी रही हैं। पत्रकार के अनुसार, यह आंकड़े सऊदी सरकार और मानवाधिकारों पर काम करने वाले कई अंतरराष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) से जुटाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि बाकी देशों की तुलना में सऊदी अरब में पाकिस्तानी नागरिकों के खिलाफ दर्ज होने वाले मामलों की संख्या भी कहीं अधिक पाई गई है। बुधवार के दिन भी एक पाकिस्तानी नागरिक को मृत्युदंड दिया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वहां पाकिस्तानी कैदियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई लगातार तेज़ गति से जारी है। सऊदी अरब में पिछले कुछ वर्षों से न्यायिक प्रक्रिया और सज़ाओं के अमल में सख्ती बढ़ी है, जिसका सीधा असर विदेशी कामगारों पर पड़ रहा है। विशेष रूप से पाकिस्तानी नागरिकों पर कानूनी शिकंजा अधिक कसता दिखाई दे रहा है।वर्ष 2024 पाकिस्तानी कैदियों के लिए बेहद कठिन साल साबित हुआ। केवल 2024 में ही 21 पाकिस्तानी नागरिकों को मृत्युदंड दिया गया। यह संख्या भयावह इसलिए भी है क्योंकि यह पिछले कई वर्षों की तुलना में अधिक है। इस प्रवृत्ति ने पाकिस्तानी समाज और विदेश में बसे प्रवासियों के बीच गहरी चिंता उत्पन्न की है।
वहीं, वर्ष 2025 के शुरुआती महीनों में ही 3 पाकिस्तानी नागरिकों को मृत्युदंड दिया जा चुका है, जो यह संकेत देता है कि यह समस्या आगे भी बनी रह सकती है। वर्तमान में सऊदी अरब की जेलों में 7,000 से अधिक पाकिस्तानी कैदी बंद हैं। इनमें से 28 कैदियों को मृत्युदंड सुनाया जा चुका है और उनकी कानूनी प्रक्रिया अंतिम चरण में है।चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में पाकिस्तानी महिलाओं की संख्या भी कम नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब की जेलों में 22 पाकिस्तानी महिलाएँ भी बंद हैं, जिनमें से दो महिलाओं को मृत्युदंड की सज़ा सुनाई जा चुकी है। यह स्थिति अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाले पाकिस्तानी नागरिकों की कठिनाइयों और असुरक्षा को उजागर करती है।जाहिद गिश्कोरी का कहना है कि पाकिस्तान सरकार इस गंभीर मुद्दे पर पर्याप्त कदम नहीं उठा पा रही है। उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और मानवाधिकार संस्थाओं से अपील की है कि वे सऊदी अरब में फंसे अपने नागरिकों की कानूनी मदद के लिए मजबूत और प्रभावी पहल करें। यह भी उल्लेखनीय है कि कई गरीब और मध्यमवर्गीय पाकिस्तानी कामगार रोजगार के लिए सऊदी अरब जाते हैं, जहाँ वे विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हैं। लेकिन कई बार कानूनी जानकारी के अभाव, स्थानीय भाषा न आने और दूतावास स्तर पर सीमित सहायता के कारण वे कठिन परिस्थितियों में फंस जाते हैं।
सऊदी अरब में अपराधों के खिलाफ कठोर कानून और त्वरित न्यायिक प्रक्रिया लागू होती है, जहाँ मृत्युदंड समेत कड़ी सज़ाएं आम हैं। ऐसे माहौल में किसी भी विदेशी नागरिक के लिए कानूनी प्रतिनिधित्व और समय पर सहायता अत्यंत महत्वपूर्ण है। पाकिस्तान के कई प्रवासी संगठन लंबे समय से यह मांग उठा रहे हैं कि सरकार विदेशों में रहने वाले अपने नागरिकों, खासतौर पर मध्य पूर्व में काम करने वाले मजदूर वर्ग को बेहतर कानूनी सहायता प्रदान करे।तथ्य भी चिंताजनक है कि पाकिस्तान में रोजगार की कमी, गरीबी और विदेशों में बेहतर कमाई की चाहत के चलते हर साल बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों का रुख करते हैं। लेकिन कानूनी सुरक्षा, उचित दस्तावेज़ीकरण और जागरूकता के अभाव में वे अक्सर ऐसे मामलों का शिकार हो जाते हैं।अंत में, यह आवश्यक है कि पाकिस्तान सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले और सऊदी अरब सहित अन्य खाड़ी देशों में फंसे नागरिकों के लिए आपात कानूनी सहायता तंत्र स्थापित करे। इसके साथ ही, ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान, विदेश जाने वाले श्रमिकों की उचित ट्रेनिंग और दस्तावेज़ी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।यह मुद्दा सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा हुआ है। हज़ारों पाकिस्तानी नागरिक और उनके परिवार आज न्याय और सहायता की उम्मीद लिए बैठे हैं। इसलिए यह समय है कि पाकिस्तान सरकार सक्रिय कूटनीति और प्रभावी सहायता के माध्यम से अपने नागरिकों को न्याय दिलाने की ठोस दिशा में कदम बढ़ाए