
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लांझी विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक किशोर समरिते ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखकर शासकीय एवं सार्वजनिक स्थानों पर घूंघट, बुर्का और हिजाब जैसे चेहरे को ढंकने वाले परिधानों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है। उन्होंने इस विषय को राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, पहचान प्रणाली और सामाजिक समानता से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बताया है।अपने पत्र में किशोर समरिते ने उल्लेख किया है कि वर्तमान समय में देश आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार की सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर चेहरा ढंकने वाले परिधानों का उपयोग सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि शासकीय कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों, न्यायालयों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर स्पष्ट पहचान न होना कानून व्यवस्था के लिए खतरा उत्पन्न करता है।किशोर समरिते ने यह भी कहा कि आज के समय में सीसीटीवी कैमरे, बायोमेट्रिक सिस्टम और अन्य निगरानी साधन सुरक्षा का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन घूंघट, बुर्का और हिजाब जैसे परिधानों के कारण इन प्रणालियों की प्रभावशीलता कम हो जाती है, जिससे अपराधियों और असामाजिक तत्वों को पहचान छिपाने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने इसे अपराध नियंत्रण में एक बड़ी बाधा बताया।अपने पत्र में उन्होंने सामाजिक पहलू पर भी जोर दिया। किशोर समरिते का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में महिला सशक्तिकरण, समानता और स्वतंत्रता अत्यंत आवश्यक है। उनके अनुसार चेहरा ढंकने की परंपराएं कई बार महिलाओं की सामाजिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता में बाधक बनती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को बिना किसी सामाजिक दबाव के समान अवसर और अधिकार मिलने चाहिए, ताकि वे खुले और सुरक्षित वातावरण में आगे बढ़ सकें।हालांकि, किशोर समरिते ने अपने पत्र में यह स्पष्ट किया कि उनकी यह मांग किसी विशेष धर्म, समुदाय या वर्ग के विरुद्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि यह विषय पूर्णतः राष्ट्रीय हित, सार्वजनिक सुरक्षा और समान नागरिक नियमों से जुड़ा हुआ है। उनका उद्देश्य समाज में विभाजन नहीं, बल्कि एक समान और सुरक्षित सार्वजनिक व्यवस्था स्थापित करना है।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह किया है कि इस विषय पर गंभीरता से विचार करते हुए राष्ट्रव्यापी स्तर पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जिससे सभी राज्यों में एक समान नीति लागू हो सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि धार्मिक स्थलों और निजी जीवन की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए, केवल शासकीय और सार्वजनिक स्थानों पर ही ऐसे नियम लागू किए जाएं।किशोर समरिते के इस पत्र के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में इस मुद्दे पर व्यापक बहस होने की संभावना जताई जा रही है। जहां एक ओर इसे सुरक्षा और समानता से जुड़ा विषय बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है।