मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि वीरांगना लक्ष्मीबाई की वीरता, बलिदान और शौर्यगाथा को जन-जन तक पहुँचाया जाना समय की मांग है। उन्होंने कहा कि ग्वालियर में पिछले 26 वर्षों से आयोजित हो रहा महारानी लक्ष्मीबाई बलिदान मेला इस दिशा में एक अत्यंत सार्थक प्रयास है। यह मेला नई पीढ़ी को राष्ट्रभक्ति, साहस और आत्मबलिदान की प्रेरणा देता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस ऐतिहासिक आयोजन को हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी, ताकि यह मेला और अधिक प्रभावशाली व व्यापक स्वरूप ले सके। उन्होंने वीरांगनाओं के जीवन पर आधारित नाट्य मंचनों के लिये 5 लाख रुपये की धनराशि देने की भी घोषणा की।डॉ. यादव ने कहा कि वीरांगनाओं की गाथाएं केवल इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं। इनका मंचन समाज को प्रेरित करता है और महिलाओं में आत्मबल और राष्ट्रसेवा की भावना जाग्रत करता है।इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में उनके सम्मान में ग्वालियर में मंत्री परिषद की बैठक आयोजित की जाएगी। यह निर्णय अटल जी के योगदान को स्मरण करने तथा भावी पीढ़ियों को उनके आदर्शों से जोड़ने के उद्देश्य से लिया गया है।

वीरांगना मेला के संस्थापक अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री श्री जयभान सिंह पवैया ने कहा कि 166 साल पहले ग्वालियर की इसी धरा पर वीरांगना लक्ष्मीबाई ने भारत माता के चरणों में अपनी आहुति दी थी। बलिदान मेला देश भक्ति जगाने का अनुष्ठान एवं महायज्ञ है। वर्ष 2000 से यह आयोजन निरंतर किया जा रहा है। श्री पवैया ने कहा कि बलिदान मेला जिस स्थान पर आयोजित किया जाता है इस धरा पर महारानी लक्ष्मीबाई का रक्त शामिल है। यह धरती जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि चंदन है। उन्होंने बलिदान मेले के आयोजन के संबंध में जानकारी भी दी।