
वेनेजुएला में अचानक भड़के सैन्य घटनाक्रम ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वेनेजुएला सरकार के दावों के अनुसार, अमेरिका ने राजधानी काराकास और उसके आसपास के इलाकों में सैन्य कार्रवाई करते हुए राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लेकर देश से बाहर ले जाया है। इस घटनाक्रम को चीन और अमेरिका के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है, क्योंकि हमले से कुछ ही समय पहले चीन के विशेष दूत ने राष्ट्रपति मादुरो से मुलाकात की थी।सरकारी जानकारी के मुताबिक, चीन के विशेष दूत किउ शियाओकी ने काराकास में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से मुलाकात की थी। इस कूटनीतिक बैठक को वेनेजुएला-चीन संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा था। हालांकि, इस मुलाकात के कुछ ही घंटों बाद तड़के करीब दो बजे राजधानी काराकास और आसपास के क्षेत्रों में जोरदार धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जिससे पूरे शहर में अफरा-तफरी मच गई।वेनेजुएला सरकार ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी सेना के हेलीकॉप्टरों और अन्य सैन्य संसाधनों ने कम से कम सात ठिकानों पर बमबारी की। इन ठिकानों में सैन्य अड्डे, रणनीतिक इमारतें और रक्षा मंत्री का आवास भी शामिल बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि काराकास के अलावा मिरांडा, अरागुआ और ला गुआइरा राज्यों में भी नागरिक और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा दावा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को लेकर सामने आया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़े बयानों में कहा गया है कि मादुरो को पकड़ लिया गया है और उन्हें देश से बाहर ले जाया गया है। वहीं, वेनेजुएला की ओर से इस मुद्दे पर लगातार कड़े बयान जारी किए जा रहे हैं और इसे देश की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया जा रहा है।वेनेजुएला सरकार ने अमेरिकी हमले के पीछे मुख्य कारण तेल संसाधनों पर कब्जा करने की मंशा बताई है। सरकारी बयान में कहा गया है कि यह हमला देश के प्राकृतिक संसाधनों की लूट और सत्ता परिवर्तन थोपने की साजिश का हिस्सा है। सरकार ने इसे जनता और राष्ट्रीय संप्रभुता के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करार दिया है।
हमलों के बाद राष्ट्रपति मादुरो द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा कानूनों के तहत रक्षा योजनाएं लागू करने के आदेश देने की बात कही गई है। सरकारी बयान में दावा किया गया है कि एक के बाद एक कई धमाकों से पूरे शहर में दहशत का माहौल है। इसके साथ ही जनता से सड़कों पर उतरकर देश की आज़ादी और संप्रभुता की रक्षा करने की अपील की गई है।वेनेजुएला सरकार ने कहा है कि इस तरह की आक्रामकता अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है, खासकर लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र में। बयान में यह भी कहा गया कि 1811 से वेनेजुएला ने साम्राज्यवादी ताकतों का सामना किया है और आज एक बार फिर देश उसी इतिहास को दोहराने के लिए तैयार है। सरकार का कहना है कि वेनेजुएला के पास आत्मरक्षा का वैध अधिकार है और वह किसी भी विदेशी आक्रमण के खिलाफ मजबूती से खड़ा रहेगा।