भोपाल, सोमवार। Mohan Yadav ने कहा है कि विकास के मुद्दे पर प्रदेश की जनता, जनप्रतिनिधि और सरकार सभी एकजुट हैं। साझा प्रयासों से मध्यप्रदेश को देश के विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर उज्जैन जिले के घट्टिया और नागदा विधानसभा क्षेत्रों से आए किसान प्रतिनिधिमंडल को संबोधित कर रहे थे।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में गरीब, युवा, अन्नदाता और नारियों के कल्याण के लिए मिशन मोड पर कार्य जारी है। विकास की अवधारणा को सशक्त करते हुए सरकार ने जीवाईएएन (GYAN) में “आई फॉर इंडस्ट्रियलाइजेशन” और “आई फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर” जोड़कर इसे ‘ज्ञानी’ (GYANII) बनाया है, जो अब प्रदेश के समग्र विकास का मूल मंत्र है।किसानों की बेहतरी को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्पादों को देश की बड़ी मंडियों तक पहुंचाने के लिए मजबूत कनेक्टिविटी अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से प्रदेश में सड़कों और राजमार्गों का जाल बिछाया जा रहा है। उज्जैन से जावरा तक बनने वाली ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाई-वे परियोजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। लगभग 5017 करोड़ रुपये से अधिक लागत की यह परियोजना क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति देगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव का उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड परियोजना को जमीन स्तर (नॉन-एलीवेटेड पैटर्न) पर त्वरित मंजूरी देने के लिए किसान प्रतिनिधियों एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने स्वागत एवं अभिनंदन कर आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर घट्टिया विधायक डॉ. सतीश मालवीय और नागदा विधायक डॉ. तेज बहादुर सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को ‘विकास पुरुष’ बताते हुए गजमाला से सम्मानित किया।मुख्यमंत्री ने कहा कि कम समय में प्रदेश में उल्लेखनीय विकास हुआ है और विभिन्न सड़क परियोजनाओं का लाभ किसानों, व्यापारियों और भावी पीढ़ियों को मिलेगा। उन्होंने बताया कि इंदौर मेट्रोपॉलिटिन सिटी एरिया में शामिल होने से उज्जैन-नागदा-खाचरौद-रतलाम सहित पूरे क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित होगा। आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में गंभीर नदी पर बने बांध को जोड़ते हुए एक नए सड़क मार्ग को मंजूरी दी गई है, जिससे उज्जैन और रतलाम के बीच तीन अलग-अलग पहुंच मार्गों से संपर्क सुदृढ़ होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि Narendra Modi के नेतृत्व में राज्य सरकार किसान हितैषी निर्णय ले रही है। ग्रीष्मकालीन उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया जा रहा है। सरसों की फसल को भावांतर भुगतान योजना में शामिल किया जाएगा। चना, मसूर, तुअर सहित दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।प्रदेश में दुग्ध उत्पादन वर्तमान में देश के कुल उत्पादन का लगभग 9 प्रतिशत है, जिसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों को टेट्रा पैक में दूध उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे बच्चों को पोषण और दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को अन्नदाता से ऊर्जादाता और ऊर्जादाता से उद्यमी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। अगले तीन वित्त वर्षों में एक लाख किसानों को सोलर पावर पंप उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे सिंचाई की समस्या दूर होगी और अतिरिक्त बिजली बेचकर किसान अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे।उन्होंने बताया कि कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों और फूड पार्कों का विकास किया जाएगा, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य स्थानीय स्तर पर मिल सके।कार्यक्रम में समाजसेवी श्री राजेश धाकड़ सहित बड़ी संख्या में किसान और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक संकल्प और प्रयासों से मध्यप्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।