
नई दिल्ली: वक्फ कानून से जुड़ी संवैधानिक चुनौतियों पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई टल गई। इस मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति कायम रहेगी। इससे पहले याचिकाकर्ताओं ने वक्फ कानून को धार्मिक आधार पर पक्षपातपूर्ण बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 15 (धार्मिक आधार पर भेदभाव का निषेध) का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था।वक्फ कानून, जो मुसलमानों की धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन के लिए बना है, पर कई वर्षों से विवाद चल रहा है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि यह कानून गैर-मुस्लिमों के साथ भेदभाव करता है और समानता के सिद्धांत के खिलाफ है। वहीं सरकार का पक्ष रहा है कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता के संरक्षण और वक्फ संपत्तियों के उचित प्रबंधन के लिए आवश्यक है।
आज की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों पक्षों से विस्तृत तर्क मांगे थे। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस मामले में सरकार को अपनी दलीलें और दस्तावेज तैयार करने के लिए और समय चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि इस अवधि में यथास्थिति बनी रहे, ताकि किसी भी पक्ष को नुकसान न हो।कोर्ट ने इस अपील को स्वीकार करते हुए सुनवाई को टाल दिया और अगले सत्र के लिए नई तारीख निर्धारित की। कोर्ट की ओर से कहा गया कि मामले की अगली सुनवाई में दोनों पक्षों के विस्तृत तर्क सुने जाएंगे और उपयुक्त निर्णय लिया जाएगा।
वक्फ संपत्तियां, जिनमें मस्जिदें, कब्रिस्तान, मदरसे और धर्मार्थ संस्थान आते हैं, का प्रबंधन भारत में वक्फ बोर्ड के तहत होता है। याचिकाकर्ता यह भी कहते हैं कि वर्तमान कानून के कारण वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की कमी है और यह मुसलमानों की धार्मिक संपत्तियों के संरक्षण में असफल है।वहीं, केंद्र सरकार और वक्फ बोर्ड का कहना है कि कानून का उद्देश्य ही इन संपत्तियों को संरक्षित करना और उनका सही प्रबंधन करना है, जिससे धार्मिक और सामाजिक हितों की रक्षा हो सके।यह मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है, क्योंकि इसमें धार्मिक स्वतंत्रता और समानता जैसे संवैधानिक अधिकारों का टकराव है। सुप्रीम कोर्ट का निर्णय न केवल वक्फ कानून पर बल्कि पूरे देश में धार्मिक संपत्तियों के प्रबंधन और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर भी प्रभाव डालेगा।