
रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच मंगलवार को रूस ने एक बार फिर यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाते हुए भीषण हमले किए। यूक्रेनी अधिकारियों ने बताया कि उत्तरी यूक्रेन के चेर्निहीव और सूमी क्षेत्रों में रूसी बमबारी से ऊर्जा अवसंरचना को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोग बिजली और पानी की आपूर्ति से वंचित हो गए हैं।यूक्रेनी ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, चेर्निहीव की क्षेत्रीय राजधानी और प्रांत के उत्तरी हिस्सों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है। रूसी हमलों में बिजली संयंत्रों और ट्रांसमिशन लाइनों को गंभीर क्षति पहुंची है। इन हमलों के कारण स्थानीय प्रशासन को आपातकालीन मरम्मत कार्य शुरू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि लगातार ड्रोन हमलों का खतरा बना हुआ है। मंत्रालय ने कहा कि मरम्मत दल सुरक्षा कारणों से कई स्थानों पर काम शुरू नहीं कर पा रहे हैं।चेर्निहीव क्षेत्र की लगभग दस लाख की आबादी हाल के हफ्तों में बार-बार होने वाले रूसी ड्रोन और मिसाइल हमलों से प्रभावित हुई है। शहर और उसके आसपास के इलाकों में नियमित रूप से ब्लैकआउट की स्थिति बनी हुई है, जिससे दैनिक जीवन गंभीर रूप से बाधित हो गया है। स्कूल, अस्पताल और जल आपूर्ति केंद्र बिजली की कमी के कारण सीमित स्तर पर कार्य कर पा रहे हैं।चेर्निहीव के कार्यवाहक मेयर ओलेक्सांद्र लोमाको ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि “मॉस्को का उद्देश्य सर्दियों के मौसम से पहले स्थानीय निवासियों को बिजली और गर्मी से वंचित कर उनके जीवन को असहनीय बनाना है।” उन्होंने कहा कि प्रशासन युद्ध की कठिन परिस्थितियों में भी बिजली आपूर्ति बहाल करने के हर संभव प्रयास कर रहा है।
स्थानीय निवासियों ने ऑनलाइन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बताया कि शहर में बिजली और पानी दोनों की आपूर्ति पूरी तरह बाधित है, साथ ही मोबाइल नेटवर्क भी बुरी तरह प्रभावित है। कई इलाकों में नागरिकों को पीने के पानी और आवश्यक वस्तुओं की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।सरकार ने आरोप लगाया है कि रूस जानबूझकर ऊर्जा ग्रिड को निशाना बनाकर यूक्रेन के नागरिकों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। मंत्रालय का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताहों में ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ी है, जो सर्दियों के आगमन से पहले नागरिकों की स्थिति को और गंभीर बना रही है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की निंदा की जा रही है। पश्चिमी देशों ने इसे “यूक्रेन की नागरिक आबादी को ठंड और अंधेरे में धकेलने की सोची-समझी रणनीति” बताया है। यूरोपीय संघ और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने ऊर्जा आपूर्ति बहाल करने में सहायता और आपातकालीन समर्थन का प्रस्ताव दिया है।रूस की ओर से इस हमले को लेकर अब तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि यह हमला रूस के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत यूक्रेन की ऊर्जा अवसंरचना को व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है ताकि देश की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था पर दबाव डाला जा सके।इन लगातार हमलों के कारण यूक्रेन की सरकार के सामने सर्दियों के मौसम में अपने नागरिकों को ऊर्जा और पानी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है।