रूस-चीन की बढ़ती नजदीकियां: भारत की रणनीतिक चुनौती बढ़ी,

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बातचीत हुई। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने रूस-चीन संबंधों की खुलकर सराहना करते हुए इन्हें वैश्विक स्तर पर “स्थिरता लाने वाली ताकत” बताया। यूक्रेन युद्ध के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में तेजी से मजबूती आई है, जिसका असर वैश्विक भू-राजनीति पर साफ दिखाई दे रहा है।रूसी सरकारी टेलीविजन पर बातचीत के दौरान पुतिन ने शी जिनपिंग को “प्रिय मित्र” कहकर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद रूस और चीन के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। पुतिन के अनुसार, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के दौर में मॉस्को और बीजिंग का विदेश नीति गठबंधन दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण स्थिरता कारक बनकर उभरा है।यह बातचीत ऐसे समय हुई है जब 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद उसे पश्चिमी देशों के कड़े प्रतिबंधों और वैश्विक अलगाव का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में चीन रूस के लिए एक अहम आर्थिक और कूटनीतिक साझेदार बनकर उभरा है। चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले शीर्ष देशों में शामिल है और व्यापार, ऊर्जा तथा अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहा है।पुतिन ने दोनों देशों के बीच बढ़ते व्यापारिक संबंधों की भी सराहना की। पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस ने अपने ऊर्जा निर्यात का रुख एशिया की ओर मोड़ दिया है, जिसमें चीन की भूमिका बेहद अहम हो गई है। वहीं चीन ने भी रूस के प्रति समर्थन जताते हुए पश्चिमी देशों की आलोचना की है और यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की सार्वजनिक रूप से निंदा नहीं की है। बदले में रूस ने ताइवान को लेकर चीन के रुख का समर्थन किया है।रूस-चीन की इस बढ़ती नजदीकी से भारत की रणनीतिक चिंताएं बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है। भारत की चीन के साथ पुरानी सीमा और भू-राजनीतिक तनातनी रही है, जबकि रूस भारत का दशकों पुराना रणनीतिक मित्र रहा है। ऐसे में बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत के लिए संतुलन बनाए रखना एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती बनता जा रहा है

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