राज्य निर्वाचन आयोग के 32वें स्थापना दिवस समारोह में निर्वाचन प्रक्रिया की महत्ता पर जोर,

भोपाल, 16 फरवरी। Madhya Pradesh State Election Commission के 32वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता, निष्पक्षता और जनभागीदारी पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम में देश के वरिष्ठ निर्वाचन अधिकारियों, विधि विशेषज्ञों एवं मीडिया प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा किए।समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित भारत निर्वाचन आयोग के पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त Om Prakash Rawat ने कहा कि बीएलओ से लेकर चीफ इलेक्शन ऑफिसर तक प्रत्येक अधिकारी निर्वाचन आयोग का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि चुनाव की प्रक्रिया में हर स्तर पर कार्यरत अधिकारी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।वन नेशन-वन इलेक्शन में स्थानीय निर्वाचन की भूमिका’ विषय पर बोलते हुए रावत ने बताया कि इस विषय पर चर्चा वर्ष 2015 से प्रारंभ हुई थी और Election Commission of India ने इस पर सहमति व्यक्त की थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वन नेशन-वन इलेक्शन लागू भी होता है, तब भी राज्य निर्वाचन आयोगों की आवश्यकता बनी रहेगी। पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोगों के माध्यम से ही संपन्न होने चाहिए। उन्होंने मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के महत्व पर भी विस्तार से प्रकाश डाला पूर्व राज्य निर्वाचन आयुक्त R. Parashuram ने ‘स्थानीय निर्वाचन में सुधार की चुनौती’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि बुद्धिजीवी वर्ग और मीडिया अक्सर नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनावों को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लेते। उन्होंने कहा, “हर वोट-हर निकाय महत्वपूर्ण है। चुनाव, चुनाव होता है—चाहे वह लोकसभा का हो या पंचायत का।” उन्होंने निर्वाचन प्रक्रिया में ‘प्रिपेयर, प्रिपेयर और प्रिपेयर’ के सिद्धांत को अपनाने पर बल दिया तथा नई तकनीकों के उपयोग को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग तुलनात्मक रूप से अधिक अधिकार संपन्न है।निजी मीडिया संस्थान के स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के विभागाध्यक्ष Narendra Kumar Singh ने ‘जमीनी लोकतंत्र में पारदर्शी एवं निष्पक्ष चुनाव’ विषय पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने 1952 के प्रथम लोकसभा चुनाव से लेकर वर्तमान चुनावों तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1977 के चुनावों ने सिद्ध कर दिया कि भारतीय मतदाता जागरूक और लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने बताया कि जहां ब्रिटेन में 1928 में सार्वभौमिक मताधिकार लागू हुआ, वहीं भारत ने स्वतंत्रता के साथ ही सभी वयस्क नागरिकों को मताधिकार प्रदान किया।वरिष्ठ अधिवक्ता Chetan Seth ने ‘स्थानीय निर्वाचन में न्यायालयीन सबक’ विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि संविधान एक जीवंत दस्तावेज है और निर्वाचन संबंधी कानूनी प्रक्रियाओं का सही पालन लोकतंत्र की मजबूती के लिए आवश्यक है।

राज्य निर्वाचन आयुक्त Manoj Shrivastava ने कहा कि हाल ही में आयोजित राज्य निर्वाचन आयोगों की बैठक में मध्यप्रदेश को ‘वर्ल्ड बैंक ऑफ स्टेट इलेक्शन कमिशन’ की उपाधि दी गई। उन्होंने बताया कि इलेक्टोरल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित हुआ है। मैदानी अधिकारियों की निष्ठा और नवाचारों के सफल क्रियान्वयन से आयोग का आत्मविश्वास और सुदृढ़ हुआ है।कार्यक्रम में आयोग की ‘निर्वाचन साहित्य ई-बुक’ का विमोचन एवं ‘प्रेक्षा मोबाइल ऐप’ का शुभारंभ किया गया। उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलेक्टरों, उप जिला निर्वाचन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव Deepak Singh ने आभार प्रदर्शन किया।समारोह ने लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्पुष्टि करते हुए यह संदेश दिया कि सशक्त लोकतंत्र की आधारशिला प्रत्येक मतदाता की भागीदारी और निष्पक्ष निर्वाचन प्रक्रिया में निहित है।

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