
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने वर्ष 2047 तक भारत को विश्वगुरु और आधुनिकतम विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इस संकल्प को साकार करने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी देश के युवाओं पर है। युवा अपनी प्रतिभा, परिश्रम, लगन और देशभक्ति के बल पर इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित रहें।राज्यपाल श्री पटेल बुधवार को अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा के तेरहवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान कीं। समारोह में लेफ्टिनेंट जनरल धीरेन्द्र सिंह कुशवाह को डी.लिट. तथा प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. युगल किशोर मिश्रा को डी.एस.ई. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।राज्यपाल श्री पटेल ने विश्वविद्यालय के नव निर्मित रिसर्च, इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण किया तथा विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित विभिन्न प्रकाशनों का भी विमोचन किया। उन्होंने कहा कि शोध, नवाचार और उद्यमिता से जुड़े ऐसे केंद्र विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और समाज व राष्ट्र के विकास में योगदान देते हैं।राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे दीक्षांत शपथ को केवल औपचारिकता न मानें, बल्कि उसे अपने जीवन का हिस्सा बनाएं और आजीवन उसका पालन करें। उन्होंने शिक्षकों से अपेक्षा की कि वे विद्यार्थियों को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान की शिक्षा देने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, संस्कार और जीवन मूल्यों से भी परिचित कराएं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि अच्छे नागरिक और जिम्मेदार इंसान का निर्माण करना है।राज्यपाल श्री पटेल ने विद्यार्थियों से देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इन महान व्यक्तित्वों के त्याग, संघर्ष और समर्पण से सीख लेकर युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।राज्यपाल ने अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय द्वारा रामायण पीठ की स्थापना की सराहना की। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पीठ रामायण पर शोध करने वाले विद्यार्थियों और विद्वानों को नए अवसर प्रदान करेगी तथा भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगी।
राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारत के प्राचीन ज्ञान, परंपराओं और मूल्यों का आधुनिक विज्ञान के साथ समावेश किया गया है। इससे देश की शिक्षा प्रणाली को भारतीयता का मजबूत आधार मिला है। विद्यार्थियों को अब ज्ञान के साथ-साथ संस्कारों की शिक्षा भी प्राप्त हो रही है, जो उन्हें संपूर्ण व्यक्तित्व के रूप में विकसित करने में सहायक है।समारोह में महामंडलेश्वर स्वामी अखिलेश्वरदास ने कहा कि जाति-पाति और धर्म के भेद को मिटाकर हम सबको सच्चे मन से भारतीय बनकर भारत माता की सेवा करनी चाहिए। उन्होंने भारत के प्राचीन दर्शन, संस्कृति और शिक्षा के महान संस्कारों को आत्मसात करने पर जोर दियाइस अवसर पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल के समक्ष विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. राजेन्द्र कुमार कुड़रिया ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं अधोसंरचना से संबंधित उपलब्धियों की जानकारी दी।समारोह में अतिथियों को स्मृति चिन्ह तथा शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में श्री रामभद्राचार्य विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय, जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, विश्वविद्यालय के आचार्यगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।