
मंत्रि-परिषद द्वारा वित्तीय अधिकार पुस्तिका 2025, भाग-1 को स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। यह पुस्तिका आगामी 1 जुलाई, 2025 से प्रभावी होगी। इसके साथ ही वित्त विभाग को इसमें लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने तथा भावी आवश्यकताओं के अनुरूप संशोधन करने की अनुमति दी गई है। साथ ही, पुस्तिका का हिन्दी अनुवाद जारी करने की भी स्वीकृति प्रदान की गई है।वर्तमान पुस्तिका वित्तीय अधिकार पुस्तिका 2012, भाग-1 के स्थान पर लागू की जाएगी, जिसे संशोधित किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। गत 13 वर्षों में विभिन्न मदों की लागतों में वृद्धि, कार्यालय संचालन से संबंधित नए प्रकार के व्यय, तथा अप्रासंगिक हो चुके मदों एवं उपकरणों के विलोपन के चलते यह संशोधन आवश्यक था। इसके अतिरिक्त नवीन व्यय मदों का समावेश, अधिकारों का विकेंद्रीकरण, और योजनाओं के क्रियान्वयन की गति बढ़ाने हेतु बजट उपयोग की समयबद्धता जैसे कारण भी संशोधन के पीछे प्रमुख रहे हैं।
नवीन पुस्तिका में निम्नलिखित प्रमुख प्रावधान सम्मिलित किए गए हैं:
- प्रशासकीय विभागों को बजट नियंत्रण अधिकारी घोषित करने का अधिकार।
- Consultancy Firm/Agency से सेवाएं प्राप्त करने हेतु स्वीकृति का अधिकार।
- Interns को संलग्न करने का अधिकार।
- मूलभूत नियम 46 के अंतर्गत मानदेय की स्वीकृति।
- पेंशन/उपदान के अधिक भुगतान को write-off करने का प्रावधान।