नई दिल्ली, 14 जून 2025: हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के प्रति बदले रुख ने भारत सरकार को हैरानी में डाल दिया है। ट्रंप प्रशासन की इस नई विदेश नीति को लेकर न केवल भारत के राजनीतिक गलियारों में बल्कि विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी व्यापक चर्चा हो रही है। यह बदलाव ऐसे समय में सामने आया है जब भारत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम क्षेत्र में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों द्वारा किए गए हमले का कड़ा जवाब दिया है।गौरतलब है कि डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान (ट्रंप 1.0), उनका पाकिस्तान के प्रति रवैया काफी सख्त था। उन्होंने 2018 में अपने एक ट्वीट में पाकिस्तान को झूठा और धोखेबाज कहा था। उस वक्त उन्होंने आतंकवाद पर नरमी बरतने के कारण पाकिस्तान को दी जाने वाली 300 मिलियन डॉलर की अमेरिकी सहायता राशि भी रोक दी थी। यह कदम ओबामा प्रशासन द्वारा आरंभ की गई सैन्य सहायता में कटौती की नीति का ही विस्तार था।लेकिन ट्रंप के दूसरे कार्यकाल (ट्रंप 2.0) में पाकिस्तान के प्रति उनका नजरिया स्पष्ट रूप से बदला हुआ दिख रहा है। हाल के बयानों और कूटनीतिक पहलुओं से यह संकेत मिल रहा है कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में अग्रसर है। यह परिवर्तन ऐसे समय पर हो रहा है जब पाकिस्तान की भूमिका वैश्विक आतंकवाद के प्रसार में अभी भी एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।भारत सरकार ने इस घटनाक्रम को गंभीरता से लिया है। विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत अमेरिका के इस बदले रुख को लेकर चिंतित है, विशेष रूप से तब जब दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखने के लिए अमेरिका और भारत के बीच गहरे सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी प्रकार की ढिलाई को स्वीकार नहीं करेगा और आतंक के विरुद्ध अपनी नीति में कोई नरमी नहीं लाएगा।
वहीं, विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन के इस बदले रुख के पीछे अमेरिका के रणनीतिक और आर्थिक हित हो सकते हैं। अफगानिस्तान, चीन, और पश्चिम एशिया से जुड़ी जटिलताओं के बीच अमेरिका पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह देखना अभी बाकी है कि यह नीति कितनी स्थायी और प्रभावी साबित होती है।अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में बदलाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन ऐसे बदलावों का क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा पर प्रभाव अवश्य पड़ता है। भारत अमेरिका से उम्मीद करता है कि वह आतंकवाद के विरुद्ध अपने पुराने रुख पर कायम रहेगा और पाकिस्तान को जवाबदेह बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।