भारत-रूस के बीच ब्रह्मोस-2K हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोग्राम को लेकर बड़ा समझौता संभव,

ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया है कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को पाकिस्तान और चीन के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम भी रोकने में असमर्थ हैं। पाकिस्तान में ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल की जबरदस्त सफलता के बाद अब भारत अगली पीढ़ी की हाइपरसोनिक ब्रह्मोस-2K मिसाइल की ओर कदम बढ़ा रहा है।मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत और रूस के बीच ब्रह्मोस-2K हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोग्राम को फिर से शुरू करने को लेकर एक बड़ा समझौता होने की संभावना है। बताया जा रहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आगामी भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच इस अत्याधुनिक रक्षा परियोजना पर सहमति बनने की उम्मीद है।]

ब्रह्मोस-2K : नेक्स्ट जेनरेशन हाइपरसोनिक मिसाइल
ब्रह्मोस-2K को मौजूदा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का नेक्स्ट जेनरेशन वर्ज़न माना जा रहा है। यह रूस की 3M22 Zircon मिसाइल टेक्नोलॉजी पर आधारित होगी और इसमें स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा। यह मिसाइल 7 से 8 मैक की हाइपरसोनिक स्पीड से उड़ान भर सकती है और इसका रेंज करीब 1500 किलोमीटर बताया जा रहा है।सबसे खास बात यह है कि ब्रह्मोस-2K न्यूक्लियर वारहेड ले जाने में सक्षम होगी, यानी यह एक हाइपरसोनिक न्यूक्लियर क्रूज मिसाइल होगी, जो दुश्मन के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम को भेदकर अपने लक्ष्य को पूरी तरह नष्ट कर सकती है।

10 साल पुराना प्रोजेक्ट अब फिर शुरू होगा
ब्रह्मोस-2K प्रोजेक्ट को करीब 10 साल पहले ही प्रस्तावित किया गया था। यह भारत के DRDO और रूस की NPO Mashinostroyeniya के बीच एक संयुक्त परियोजना है। लेकिन विभिन्न कारणों से यह प्रोग्राम ठंडे बस्ते में चला गया था। अब जब पाकिस्तान के खिलाफ ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर में अद्भुत सफलता दिखाई है, तो इस प्रोग्राम को फिर से सक्रिय करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।अगर यह समझौता होता है, तो भारत की सामरिक क्षमता में जबरदस्त इज़ाफ़ा होगा और देश की हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक दुनिया के अग्रणी देशों की बराबरी पर पहुंच जाएगी।

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