
भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच हाल ही में हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का असर दक्षिण एशियाई कपड़ा उद्योग पर दूरगामी होने वाला है। 27 जनवरी को संपन्न हुए इस समझौते से जहां भारतीय गारमेंट और टेक्सटाइल उद्योग को यूरोपीय बाजार में बड़ा लाभ मिलने की संभावना है, वहीं बांग्लादेश के लिए यह डील गंभीर चुनौती बनकर उभर रही है। बांग्लादेश के गारमेंट निर्यातक और उद्योग विशेषज्ञ इस समझौते को अपने लिए “खतरे की घंटी” मान रहे हैं।समझौते के अनुसार, यूरोपीय संसद और भारतीय संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह FTA वर्ष 2027 से लागू होने की उम्मीद है। इसके लागू होते ही भारतीय कपड़ा और परिधान उत्पादों पर यूरोपीय बाजार में लगने वाला लगभग 12 प्रतिशत आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा। इससे भारतीय कंपनियों को टैक्स-फ्री एंट्री मिलेगी और वे कीमत के मामले में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगी। इसका सीधा असर बांग्लादेश पर पड़ेगा, जिसे अब तक यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच का लाभ मिलता रहा है।बांग्लादेश के सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग (CPD) के सीनियर फेलो मुस्तफिजुर रहमान ने अखबार द डेली स्टार से बातचीत में कहा कि इस समझौते के परिणाम बेहद अहम होंगे, खासकर गारमेंट सेक्टर के लिए। उन्होंने चेतावनी दी कि जैसे ही भारत को ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा, बांग्लादेश यूरोपीय यूनियन के बाजार में कम प्रतिस्पर्धी हो जाएगा। यह स्थिति बांग्लादेश के निर्यातकों के लिए लंबे समय से बनी बढ़त को खत्म कर सकती है।बांग्लादेश को दोहरा झटका इसलिए भी लगने की आशंका है क्योंकि वह खुद भी जल्द ही अपनी मौजूदा विशेष स्थिति खोने जा रहा है। बांग्लादेश को सबसे कम विकसित देश (LDC) होने के कारण यूरोपीय यूनियन में बिना किसी टैरिफ के निर्यात की सुविधा 1975 से मिल रही है। लेकिन यह सुविधा अब केवल तीन वर्षों के लिए शेष है, जिसकी गणना इस साल नवंबर से शुरू होगी। इसके बाद बांग्लादेश LDC श्रेणी से बाहर हो जाएगा और उसे भी यूरोपीय बाजार में टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।LDC सुविधा के चलते बांग्लादेश यूरोपीय यूनियन के लिए कपड़ा निर्यात करने वाले देशों में एक प्रमुख खिलाड़ी बन चुका है। वर्तमान में वह चीन के बाद EU को सबसे अधिक कपड़ा निर्यात करने वाला दूसरा देश है। डेनिम, ट्राउजर और टी-शर्ट जैसी कई श्रेणियों में बांग्लादेश ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। उद्योग से जुड़े नेताओं का दावा है कि यूरोप में हर तीन में से एक व्यक्ति बांग्लादेश में बनी डेनिम पैंट पहनता है। वित्त वर्ष 2024-25 में यूरोपीय यूनियन को बांग्लादेश का कुल गारमेंट निर्यात 19.71 अरब डॉलर रहा, जो उसके कुल गारमेंट एक्सपोर्ट का 50 प्रतिशत से अधिक है।
बांग्लादेश की ब्रोकरेज फर्म BRAC EPL द्वारा जारी एक रिसर्च नोट में कहा गया है कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण यूरोपीय खरीदारों की मोलभाव की ताकत और मजबूत होगी। इससे कीमतों पर दबाव बढ़ेगा और बांग्लादेश के निर्यात मार्जिन पर संरचनात्मक असर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, यह असर केवल अल्पकालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक हो सकता है।हालांकि बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) के निदेशक फैसल समद का मानना है कि EU–भारत FTA का असर तुरंत देखने को नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसके प्रभाव धीरे-धीरे सामने आएंगे, लेकिन दीर्घकाल में प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी हो जाएगी। उनके अनुसार, भारत की प्रतिस्पर्धात्मक ताकत दो प्रमुख आधारों पर टिकी है—स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चा कपास और विशाल एवं कुशल मानव संसाधन। इसके साथ ही भारत सरकार की अनुकूल वित्तीय और औद्योगिक नीतियां भी भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में मजबूती प्रदान कर रही हैं।कुल मिलाकर, भारत–यूरोपीय यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बांग्लादेश के गारमेंट उद्योग के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। आने वाले वर्षों में बांग्लादेश को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक रणनीतियों पर पुनर्विचार करना होगा, ताकि वह यूरोपीय बाजार में अपनी मजबूत स्थिति को किसी हद तक बनाए रख सके।