
लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, चुनावी पारदर्शिता और मूलनिवासी बहुजन समाज के अधिकारों की रक्षा हेतु भारत मुक्ति मोर्चा के नेतृत्व में और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा, बहुजन क्रांति मोर्चा एवं राष्ट्रीय परिवर्तन मोर्चा के तत्वाधान में बहुजन समाज के देशभर के हजारो संगठनों के समर्थन के साथ 1 जुलाई 2025 को राष्ट्रव्यापी भारत बंद घोषित किया गया है। यह आंदोलन आरएसएस -बीजेपी द्वारा संचालित वर्तमान केंद्र सरकार की मूलनिवासी बहुजन समाज एवं देशविरोधी विरोधी विभिन्न नीतियों और सरकारों द्वारा बहुजन समाज के ऐतिहासिक व संवैधानिक अधिकारों की उपेक्षा के खिलाफ किया जा रहा है।
‘भारत बंद’ के प्रमुख मुद्दे एवं माँगें:

ईवीएम को हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराया जाए।भारत की चुनावी प्रणाली में ईवीएम (ईवीएम) की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। चुनावों में हो रहे धांधली के कई सारे उदाहरण सामने आऐ है। भारत की जनता का ईवीएम (ईवीएम) मशीन के द्वारा किए जा रहे चुनाव प्रक्रिया पर बिलकुल भरोसा नहीं रहा है। किसी भी प्रकार के लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए मुक्त, निष्पक्ष एवं पारदर्शी चुनाव आवश्यक हैं, जिसके लिए बैलेट पेपर प्रणाली पुनः लागू की जाना आवश्यक है, सभी आम चुनावो में एवं के बजाय बैलट पेपर लागू करने के लिए।ओबीसी एवं सभी जातियों की जाति आधारित जनगणना तुरंत कराई जाने के लिए।आरएसएस-बीजेपी द्वारा संचालित वर्तमान केंद्र सरकार ने ओबीसी और सभी जातियों की जनगणना करने से पहले से ही इनकार एवं विरोध किया है, जो सामाजिक न्याय के सिद्धांतों केखिलाफ है। संविधान में पिछड़े वर्गों (ओबीसी) को प्रतिनिधित्व (आरक्षण) और अन्य संवैधानिक लाभऔर सुविधाएँ सुनिश्चित करने के लिए उनकी वास्तविक जनसंख्या का आंकड़ा आवश्यक है। साथ साथ अन्य सभी समुदायों की भी जातीजनगना किया जाना आवश्यक है। जिसके आधारपर ओबीसीं और अन्य पिछड़े वर्ग के पिछड़ेपन की वास्तविक जानकारी स्पष्ट हो। इसके लिए ओबीसी के साथ सभी जाति समूहों की जाति आधारित जनगणना अविलंब की जानी के लिए और इसके आधार पर सभी जातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन हो और नीतियाँ समानता के आधार पर बनाई जाने के लिएमूलनिवासी बहुजन महापुरुषों की आरएसएस और भाजपा द्वारा संसद में की गई अवमानना का विरोध।देश के महान महापुरुष डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर जी के बारे में आरएसएस-बीजेपी द्वारा संचालित वर्तमान केंद्र सरकार के गृहमंत्री अमित शाह द्वारा संसद में अभद्र टिप्पणी करते हुए अवमानना की गयी है। इसी तरह से हर बार आरएसएस-बीजेपी द्वारा संचालित वर्तमान केंद्र सरकार के सम्बंधित पदाधिकरियों और व्यक्तियों द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज, राष्ट्रपिता ज्योतिबा फुले, राजर्षि शाहूजी महाराज, डॉ. बाबासाहब अम्बेडकर, पेरियार रामासामी, बिरसा मुंडा आदि. महापुरुषों का अपमान सत्ताधारी दलों द्वारा किया जा रहा है। संसद में आरएसएस-बीजेपी द्वारा बहुजन महापुरुषों के योगदान को नजरअंदाज करना और उनका अपमान करना निंदनीय है। इस बात को हम कतई बर्दास्त नहीं करेंगे। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं और संसद में इन महापुरुषों के योगदान को उचित सम्मान करने की माँग करते हैं।बोधगया के महाबोधि महाविहार की मुक्ति के लिए।बोधगया स्थित महाबोधि महाविहार, जहाँ भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ, वह मूलनिवासी बहुजन समाज की धरोहर है। वर्तमान में इस ऐतिहासिक स्थल पर ब्राह्मणवादी पंडितों का कब्जा है, जिसे तुरंत समाप्त किया जाना चाहिए। हम माँग करते हैं कि महाबोधि महाविहार को पूरी तरह से बौद्ध अनुयायियों के नियंत्रण में दिया जाए।वक्फ संशोधन विधेयक-2025 असंवैधानिक है।वक्फ संशोधन विधेयक-2025 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26, 29 में निहित समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय के मूल सिद्धांतों को उल्लंघन करता है। इससे वक्फ की स्वायत्तता समाप्त हो जायेगी और वक्फ की संपत्तियों पर पूंजीपतियों और सरकारी भू माफियाओं का अवैध कब्जा हो जायेगा। इस असंवैधानिक काले कानून को तुरंत खारिज़ करने की माँग करते है।
वैधानिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण तरीके से ‘भारत बंद’।हम यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह ‘भारत बंद’ भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (a) एवं 19 (1) (b) के तहत भारत के समस्त नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों के अंतर्गत किया गया जा रहा है। अनुच्छेद 19 (1) (a)- प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। अनुच्छेद 19 (1) (b)-प्रत्येक नागरिक को शांतिपूर्वक एकत्र होने का अधिकार है। अतः यह आंदोलन पूरी तरह से लोकतांत्रिक, संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाने का आवाहन किया गया है।राज्य, जिला एवं स्थानीय प्रशासन से अनुरोध ।हम राज्य, जिला एवं स्थानिय प्रशासन, पुलिस प्रशासन एवं अन्य संबंधित सभी प्रशासनिक अधिकारियों से अनुरोध करते हैं कि, इस ‘भारत बंद’ आंदोलन को लोकतांत्रिक भावना से देखें और नागरिकों के मौलिक एवं संवैधानिक अधिकारों का सम्मान एवं रक्षा करें।भारत बंद’ में संवैधानिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से सहभागी नागरिकों एवं आंदोलनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की अनावश्यक बाधा उत्पन्न न करें तथा किसी भी प्रकार की दमनकारी कार्रवाई से प्रशासन दूर रहे और भारतीय संविधान द्वारा घोषित किये हुए मौलिक अधिकारों की और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करें।