भारत-अमेरिका तनाव का असर: अमेरिकी टूरिज्म इंडस्ट्री पर घट रही भारतीय पर्यटकों की संख्या,

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की रणनीति अब अमेरिका पर ही उल्टा पड़ने लगी है। दोनों देशों के बीच जारी तनाव का सीधा असर अमेरिकी पर्यटन उद्योग पर दिखने लगा है।अमेरिकी वाणिज्य विभाग के अधीन नेशनल ट्रैवल एंड टूरिज्म ऑफिस (NTTO) द्वारा बुधवार को जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में अमेरिका आने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत घट गई है। इससे पहले जून में 8 प्रतिशत और जुलाई में 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। यह लगातार तीसरा महीना है जब भारतीय पर्यटकों की संख्या में कमी आई है। स्थिति ऐसे समय में सामने आई है जब बीते वर्ष (2024) की इसी अवधि में भारतीय पर्यटकों की संख्या में भारी इजाफा दर्ज किया गया था। जून 2024 में 35 प्रतिशत, जुलाई में 26 प्रतिशत और अगस्त में 9 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी। पर्यटन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा गिरावट का सबसे बड़ा कारण भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद और राजनीतिक तनाव है।

तनाव की शुरुआत मई 2025 में हुई, जब भारत ने राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे का खंडन किया कि अमेरिका ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराया था। इसके बाद अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगा दिए। इनमें 50 प्रतिशत सामान्य आयात शुल्क और रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क शामिल था।विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का खामियाजा अमेरिका को पर्यटन क्षेत्र में उठाना पड़ रहा है। भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी (लगभग 1.5 अरब) और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था (GDP 4.2 ट्रिलियन डॉलर) है। ऐसे में भारतीय पर्यटकों का महत्व अमेरिकी बाजार के लिए अत्यधिक है।

यात्रा और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े वैश्विक अध्ययनों में पहले ही अनुमान लगाया गया था कि भारतीय पर्यटक 2030 तक हर साल अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर 144 अरब डॉलर तक खर्च करेंगे। इसी तरह, मैकेंजी की 2024 की रिपोर्ट में बताया गया था कि भारत की आउटबाउंड ट्रैवल 2022 में 1.3 करोड़ यात्राओं से बढ़कर 2040 तक 8 करोड़ से अधिक हो जाएगी।, हाल की गिरावट अगर लंबे समय तक जारी रही तो अमेरिकी टूरिज्म इंडस्ट्री को अरबों डॉलर का नुकसान उठाना पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि इस स्थिति से बचने के लिए दोनों देशों को संवाद और कूटनीतिक स्तर पर समाधान तलाशना होगा।

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