भोपाल मे “चमकते सितारे-4 सम्मान एवं मुशायरा”,

भोपाल, खुशबू एजूकेशन एण्ड कल्चरल सोसायटी भोपाल द्वारा दिनांक 9/11/2025 को शाम 4.00 बजे दुष्यंत कुमार संग्राहलय में ”चमकते सितारे 4“ सम्मान एवं मुशायरे का आयोजित हुआ जिसमें भोपाल के वरिष्ठ शायर रईस सिद्दीकी ने अध्यक्षता की, मुख्य अतिथि श्री इक़बाल मसूद एवं श्री विजय तिवारी थे। इस अवसर पर उस्ताद शायर स्व. वाहिद प्रेमी की याद में भोपाल के युवा शायर श्री अशफ़ाक़ अंसर को वाहिद प्रेमी अवार्ड से सम्मानित किया गया और सीहोर के शायर श्री सादिक़ राईन को ”आज का मेहमान शायर सम्मान” से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्रोता अवार्ड भोपाल के ओमप्रकाश गौर को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन युवा शायर सोहेल उमर इस अवसर पर युवा एवं वरिष्ठ शायरोंः- श्री सरवत जै़दी भोपाली, श्री तमकीन बहादुर, सीहोर, श्री अज़ीम असर, श्री आफताब अदील, सुश्री ग़ोसिया खान सबीन, सुश्री खुशबू श्रीवास्तव, सुश्री सीमा शिवहरे सुमन, श्री संतोष खेडवरकर, श्री आशीष चैबे, श्री अनीस खान, सीहोर, श्री सईद शहंशाह, श्री मशगूल मेहरबानी, श्री ओरंगज़ेब आज़म, श्री एस.एम. मुबश्शिर, श्री आदिल इमाद, श्री नादिर भोपाली। शायरों द्वारा जो रचना पाठ किया गया वहां मौजूद सभी दर्शकों, श्रोताओं ने खूब सराहा। दुआ लेनी पड़ेगी माँ की तुझको/बुलन्दी पर जो जाना चाहता है-सादिक़ राईन, सीहोर, क्या बे अमल गुज़ार दी दुनिया में ज़िन्दगी/क्यों आक़ेबत के नाम से घबरा रहे हैं लोग-सरवत ज़ैदी, भोपाल, वफ़ा, विसाल, हिज्र, फि , दर्द मजबूरी/ज़रा सी उम्र में, कितने ज़माने आते हैं-रईस सिद्दीक़ी, भरे घर में है इक कोना हमारा/न होने सा है अब होना हमारा-इक़बाल मसूद, किसी की याद में खोए तो इस क़दर खोए/कि किस की याद में खोए थे ये भी याद नहीं-विजय तिवारी विजय, क़नाअत कर क़िसमत के लिखे पर/परिंदे हिर्स के दिल से उड़ा दे-अशफ़ाक़ अंसर, अगरचे आज नहीं कल हिसाब मांगेगा/ज़मीर सबका सभी से जवाब मांगेगा-सुहेल उमर, संतुलन लाज़मी है जीवन में/ज़िन्दगी चाहे रस्सियाँ बदले-साजिद प्रेमी, डाईस पे एक्टिंग से बचो जब ग़ज़ल पढ़ो/ऐसा तो मत करो कि तमाशा कहें जिसे-अज़ीम असर, आशना जितने थे सब ना आशना होते रहे/एक क़यामत नज़रों से गिराना हो गया-तमकीन बहादुर, सीहोर, राहज़न रहबरों के लिबासों में हैं/लुट न जाऐं कहीं क़ाफिला दोस्तो-आफताब अहमद अदील, शहर है नाम को ज़िंदा, हैं ज़िंदा नाम को आदम/टहलती सी हुई लाशें मुझे अच्दी नहीं लगाएं-खुश्बू श्रीवास्तव, लफ़ज़ों से दिल चीरा करता है ज़ालिम/खंजर वा कफ़ ही क्या क़ातिल होता है-सीमा शिवहरे सुमन, हम बडत्रे जनता बने फिरते हैं/जिसके आदेशों की बोली हो गई-आशीष चोबे, तिश्नगी जब मुझे दीदार की तडत्रपाए तो/ऐसे हालात में दरया वो नज़र आता है-संतोष खिरवड़कर, एक दिन फिर खुदा मिलाऐ हमें/अपने होठों पे यह दुा रखना-सईद शहंशाह, मुझको प्यारी थी वो ज़िन्दगी दोस्तो/काम जो आपके आ गई दोस्तो-डाॅ. अनीस खान, सारे ही रंग देखे आज़म पर तेरे किरदार पर/कोई भी न रास आए सादगी को छोड़कर-ओरंगज़ेब आज़म, हमारे लहजे में बाक़ी है कुछ आंसू पुराने से/हमीं में दफन है तहज़ीब हर अच्छी रिवायत की-आदिल इमाद, तिरी यादों की माला जप्ते-जप्ते/मिरी साँसों में छाले पड़ गये हैं-नादिर भोपाल, मुबश्शिर बात तक करते नहीं हम/तुम्हारे साथ रहना रायगाँ है-एस.एम.मुबश्शिर। अंत में श्री एस.एम. मुबश्शिर ने सभी श्रोताओं, साहित्यप्रेमियों, पत्रकारों, छायाकारों एवं उपस्थित शायरों का धन्यवाद किया।
साजिद प्रेमी
संरक्षक
मोबा. 8770527092

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