
विश्व की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक भोपाल गैस त्रासदी की 41वीं बरसी के अवसर पर बुधवार, 3 दिसम्बर को बरकतउल्ला भवन, सेंट्रल लाइब्रेरी, भोपाल में दिवंगत व्यक्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। इस अवसर पर सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर मानवता, शांति और सद्भाव का संदेश देंगे।प्रार्थना सभा सुबह 10:30 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित होगी, जिसमें हिन्दू, मुस्लिम, बोहरा, ईसाई, सिख, जैन और बौद्ध संप्रदाय के धर्मगुरुओं द्वारा पाठ एवं प्रार्थनाएँ की जाएँगी। इस आयोजन का उद्देश्य त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले हजारों लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करना और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करना है।कार्यक्रम में शहर के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संस्थाओं, गणमान्य नागरिकों एवं विभिन्न धर्मों के अनुयायियों की उपस्थिति रहेगी। यह आयोजन न केवल स्मरण का अवसर है, बल्कि समाज में एकता, समरसता और करुणा के संदेश को पुनः स्थापित करने का प्रयास भी है। गैस त्रासदी पीड़ितों के जीवन में आई चुनौतियों और उनके संघर्ष को याद करते हुए यह प्रार्थना सभा संकल्प लेगी कि समाज उनके पुनर्वास, स्वास्थ्य और अधिकारों के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।ज्ञात हो कि 3 दिसंबर 1984 को हुए इस भीषण हादसे ने हजारों लोगों की जान ली थी और लाखों को गंभीर स्वास्थ्य एवं सामाजिक समस्याओं से जूझने के लिए मजबूर कर दिया था। यह बरसी हर वर्ष उस दुःखद रात के दर्द को स्मरण करने के साथ-साथ भविष्य में ऐसी किसी भी घटना को रोकने के लिए जागरूकता बढ़ाने का अवसर भी देती है। इस वर्ष भी सभी संप्रदायों के धर्मगुरु एक मंच से शांति, संवेदना और पर्यावरण सुरक्षा का संदेश देंगे।
आयोजन समिति ने नागरिकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करें और सर्वधर्म सद्भाव की इस प्रार्थना सभा का हिस्सा बनें।यह कार्यक्रम मानवता के उन मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रयास है, जिन्हें इस त्रासदी ने गहरी चोट पहुंचाई थी। सम्मिलित होकर हम न केवल पीड़ितों को याद करते हैं, बल्कि यह भी संकल्प लेते हैं कि भविष्य में इस प्रकार की किसी भी त्रासदी के प्रति समाज अधिक सजग, संवेदनशील और एकजुट रहेगा।