बांग्लादेश से पाकिस्तान तक सक्रिय आतंकी कॉरिडोर से सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप,

पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां इन दिनों एक नए और गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। यह संकट है बांग्लादेश से पाकिस्तान तक सक्रिय हो चुके आतंकी कॉरिडोर का, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी युवक पाकिस्तान और अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठनों का हिस्सा बन रहे हैं। पाकिस्तान की सेना, खुफिया एजेंसियों और आंतरिक सुरक्षा तंत्र के लिए यह चिंता का विषय इसलिए भी है क्योंकि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पहले से ही देश में हिंसा को बढ़ाने में लगा है, और अब इसमें बाहरी देशों से आए लड़ाके भी शामिल होने लगे हैं।पिछले कुछ महीनों में कई खुलासों से यह साफ हो गया है कि बांग्लादेश के युवाओं को सोशल मीडिया के माध्यम से कट्टरपंथी बनाया जा रहा है और इस्लाम के नाम पर “जिहाद” में शामिल होने का झांसा देकर उन्हें पाकिस्तान भेजा जा रहा है। हाल ही में सामने आया मामला फैसल हुसैन का है, जिसने दुबई में काम करने का झूठ बोलकर पाकिस्तान की यात्रा की और बाद में TTP में शामिल हो गया। फैसल हुसैन के TTP में जाने की खबर ने बांग्लादेश और पाकिस्तान दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों को चिंतित कर दिया है।26 सितंबर 2025 को खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के करक जिले में हुए एक सैन्य अभियान के दौरान फैसल हुसैन मारा गया। उसके भाई अरमान ने सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों के आधार पर उसकी पहचान की पुष्टि की। वह उन कम से कम चार बांग्लादेशी नागरिकों में से एक है, जिनकी TTP के साथ लड़ाई के दौरान मौत की पुष्टि हो चुकी है।पाकिस्तान की सरकार, जो TTP को “फितना अल-खवारिज” नाम से संबोधित करती है, ने स्वीकार किया है कि विदेशी आतंकी तत्वों की मौजूदगी संगठन को और खतरनाक बना रही है। TTP पहले से ही पाकिस्तान के लिए बड़ी सुरक्षा चुनौती है, लेकिन अब इसमें विदेशी नागरिकों का शामिल होना इस खतरे को कई गुना बढ़ा रहा है।बांग्लादेश की काउंटर टेररिज्म एंड ट्रांसनेशनल क्राइम (CTTC) यूनिट द्वारा किए गए विश्लेषण से पता चला है कि कम से कम दो दर्जन बांग्लादेशी नागरिक वर्तमान में पाकिस्तान में TTP और अन्य जिहादी संगठनों के लिए लड़ रहे हैं। CTTC का दावा है कि कई भर्ती नेटवर्क बांग्लादेश में सक्रिय हैं, जो युवाओं को पहले कट्टरपंथी बनाते हैं और फिर उन्हें मध्य पूर्व के किसी तीसरे देश के रास्ते पाकिस्तान भेजते हैं।यह रणनीति इसलिए अपनाई जाती है ताकि सुरक्षा एजेंसियां उनकी ट्रैकिंग न कर सकें। कई युवाओं को दुबई, कतर, सऊदी अरब या मलेशिया में नौकरी के नाम पर बाहर भेजा जाता है, जहां से उन्हें पाकिस्तान पहुंचा दिया जाता है।


पाकिस्तानी आतंकी समूह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर बड़े पैमाने पर डिजिटल भर्ती अभियान चला रहे हैं। इन अभियानों में धार्मिक संदेशों, प्रचारात्मक वीडियो और आर्थिक प्रलोभनों का इस्तेमाल किया जाता है। युवाओं को बताया जाता है कि “जिहाद” करना धार्मिक कर्तव्य है और इसके बदले उन्हें मोटी रकम भी दी जाएगी।मनोवैज्ञानिक और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक संकट, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता के दौर में ऐसे प्रचार का असर युवाओं पर अधिक पड़ता हैवीजा प्रक्रिया की ढिलाई बन रही है समस्यामोहम्मद यूनुस के शासनकाल में बांग्लादेश और पाकिस्तान के वीजा नियमों में ढील ने इस संकट को और बढ़ाया है। दोनों देशों के नागरिकों को अब अधिक आसानी से एक-दूसरे के देश में प्रवेश मिल रहा है। इसी ढिलाई का फायदा आतंकी रिक्रूटर उठा रहे हैं। कई रिक्रूटर्स बांग्लादेश जाकर युवाओं से मिलते हैं, उन्हें कट्टरपंथी सामग्री दिखाते हैं और फिर उन्हें संगठन में शामिल होने के लिए तैयार करते हैं।बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियों ने बताया है कि कई विदेशी ग्रुपों के सदस्य पर्यटक या कारोबारी के रूप में बांग्लादेश का दौरा कर रहे हैं, लेकिन उनका असली उद्देश्य आतंकियों की भर्ती करना होता है।पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ जनरल असीम मुनीर बढ़ती बांग्लादेशी आतंकी गतिविधियों को लेकर बेहद चिंतित हैं। पाकिस्तान पहले ही आंतरिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और बढ़ते आतंकी हमलों से जूझ रहा है। ऐसे में विदेशी लड़ाकों का पाकिस्तान में प्रवेश उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की नई परत जोड़ रहा है।

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