
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुरूप प्रदेश सरकार गरीब, किसान, युवा और नारी—समाज के हर वर्ग के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार निरंतर कठिनाइयों को दूर करते हुए प्रदेश में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पूर्व में मेडिकल कॉलेज शुरू करने की प्रक्रिया जटिल थी, लेकिन प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा नेशनल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की व्यवस्था लागू किए जाने से मेडिकल कॉलेज स्थापना की प्रक्रिया सरल हुई है।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष 2002-03 तक मध्यप्रदेश में केवल 5 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि वर्तमान में प्रदेश में 19 शासकीय एवं 14 निजी मेडिकल कॉलेज संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी माह बैतूल, धार, कटनी और पन्ना में 4 नए मेडिकल कॉलेजों का भूमिपूजन किया जाएगा। इसके साथ ही बीएएमएस की पढ़ाई के लिए एक वर्ष में 8 नए आयुर्वेदिक कॉलेज भी प्रारंभ किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि संकल्प पत्र के अनुरूप प्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटों पर मेडिकल कॉलेज उपलब्ध कराए जाएंगे और शीघ्र ही प्रदेश के प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज होंगे। राज्य सरकार मेडिकल के साथ-साथ आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक और यूनानी चिकित्सा शिक्षा संस्थानों की संख्या भी बढ़ा रही है, जिससे सुदूर ग्रामीण और जनजातीय अंचलों तक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित हो सके।मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित आरोग्य सेवा संकल्प सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के बच्चों के साथ मजबूती से खड़ी है। एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 16.50 लाख रुपए की सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश का प्रत्येक बालक योग्य और सक्षम नागरिक बने। युवा चिकित्सक समाज सेवा के लिए आगे आएं और लोकतंत्र के सच्चे प्रहरी बनें। सशक्त और निरोगी राष्ट्र के निर्माण के लिए सभी को एकजुट होकर प्रयास करना होगा।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने शिक्षा विभाग और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग का विलय कर लोक स्वास्थ्य प्रबंधन को सुदृढ़ किया है। इससे चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने एक वर्ष में 8,000 चिकित्सा शिक्षा विद्यार्थियों को 207 करोड़ रुपए की सहायता उपलब्ध कराई है, ताकि विद्यार्थी फीस की चिंता से मुक्त होकर अपनी पढ़ाई और कौशल विकास पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकें।
मुख्यमंत्री ने आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयुर्वेद ऐसी समग्र चिकित्सा प्रणाली है, जो केवल नब्ज के माध्यम से भी रोग की पहचान कर सकती है। प्रकृति स्वयं सभी जीव-जंतुओं की रक्षा करती है और जहां बीमारी उत्पन्न होती है, उसके आसपास ही औषधीय वनस्पतियां उपलब्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि पतंजलि योग शास्त्र में शरीर के पांच प्राणों का उल्लेख है और मानव शरीर में ब्रह्मांड जैसी ऊर्जा विद्यमान है। कोविड-19 महामारी के दौरान आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति और काढ़े की प्रभावशीलता को पूरी दुनिया ने देखा, जब आयुर्वेदिक चिकित्सकों ने अग्रिम पंक्ति में रहकर सेवा दी।मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जनजातीय वीरों के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि रानी दुर्गावती, रानी अवंतीबाई, राजा शंकर शाह, रघुनाथ शाह और टंट्या मामा जैसे महान व्यक्तित्वों ने मातृभूमि की रक्षा में अतुलनीय योगदान दिया है। प्रदेश सरकार जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार सहित सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए संकल्पित है। उन्होंने छात्रों से जनजातीय अंचलों में सेवा देने का आह्वान किया।कार्यक्रम में जनजातीय क्षेत्रों में उत्कृष्ट सेवा देने वाले डॉ. मुकेश तिलगाम, डॉ. राजेश डाबर, डॉ. महिला डाबर, सेवा अंकुर के अध्यक्ष डॉ. अश्विनी, डॉ. हितेश और डॉ. अभय ओहरी को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों में कार्यरत मेडिकल अधिकारियों को आरोग्य किट वितरित की, जिनमें जीवन रक्षक दवाएं और जांच उपकरण शामिल हैं। प्रदेशभर में 8,000 से अधिक आरोग्य किट वितरित की जा रही हैं। कार्यक्रम के दौरान सेवा अंकुर संस्था पर आधारित वीडियो फिल्म का भी प्रदर्शन किया गया