पाकिस्तान में महंगाई ने नए रिकॉर्ड बना दिए हैं। देश की आर्थिक स्थिति पहले से ही नाजुक थी, लेकिन अब हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आम जनता के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी कठिन हो गया है। बाजारों में रोजमर्रा की हर वस्तु की कीमतें आसमान छू रही हैं — खासतौर पर सब्जियों की। इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा में है टमाटर, जिसकी कीमत 600 रुपये प्रति किलो तक पहुंच चुकी है।बीते एक महीने में टमाटर की कीमतों में 400 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। आम पाकिस्तानी नागरिक के लिए यह सब्जी अब विलासिता की वस्तु बन गई है। सोशल मीडिया पर लोग मजाक में कह रहे हैं कि अब टमाटर “लाल सोना” हो गया है। दुकानदारों के अनुसार, जहां पहले ग्राहक किलो में टमाटर लेते थे, अब कई लोग सिर्फ 100 ग्राम या एक-दो टमाटर लेकर काम चला रहे हैं।महंगाई की आग अब पाकिस्तान की संसद तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक सांसद ने सत्र के दौरान टमाटर उठाकर दिखाया और कहा — “मैं बड़ी मुश्किल से यह टमाटर यहां लाया हूं। हमारे सांसद फ़ारुख साहब का शुक्रिया, जिन्होंने यह टमाटर मंगवाया। इसकी कीमत 75 रुपये है।”यह बयान सुनकर संसद में ठहाके भी गूंजे, लेकिन जनता के दर्द को लेकर माहौल गंभीर बना रहा। सांसदों ने व्यंग्य में कहा कि अब टमाटर खरीदने के लिए भी “कर्ज योजना” चलानी पड़ेगी।इस मुद्दे पर कई सांसदों ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार के गलत नीतिगत फैसले, बढ़ती डॉलर निर्भरता और सीमा पर तनाव ने आम नागरिक की कमर तोड़ दी है। कई सांसदों ने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक रिश्ते सामान्य थे, तब भारत से आने वाले सस्ते टमाटर ने बाजार को स्थिर रखा था। आज हालात इतने खराब हैं कि लोग भारतीय टमाटर के आयात की मांग करने लगे हैं।

क्यों बढ़ी टमाटर की कीमतें?
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान में टमाटर की कीमतों में इस भीषण वृद्धि के पीछे मुख्य कारण है पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा का बंद होना। अक्टूबर से दोनों देशों के बीच तनाव और सैन्य झड़पें जारी हैं। अफगानिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के रिश्ते और खराब हो गए हैं।पाकिस्तान और अफगानिस्तान की 2,600 किलोमीटर लंबी सीमा पर हजारों ट्रक रोजाना व्यापारिक वस्तुएं लेकर गुजरते थे। इनमें सब्जियां, फल, अनाज और पेट्रोलियम उत्पाद शामिल होते हैं। सीमा बंद होने से यह व्यापार लगभग ठप हो गया है। अफगानिस्तान से पाकिस्तान में आने वाले फलों और सब्जियों की आपूर्ति रुकने के कारण बाजारों में भारी किल्लत हो गई है।टमाटर, प्याज, आलू और अदरक जैसी आवश्यक वस्तुएं अब महंगे आयात या सीमित स्थानीय उत्पादन पर निर्भर हैं, जिससे दाम कई गुना बढ़ गए हैं।
जनता बेहाल, सोशल मीडिया पर गुस्सा
महंगाई के कारण पाकिस्तान की जनता बुरी तरह त्रस्त है। सोशल मीडिया पर लोग सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। ट्विटर (एक्स) और फेसबुक पर “#TomatoCrisis” और “#MehengaiMaarGayi” जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।कई नागरिकों ने मजाकिया अंदाज़ में लिखा कि अब “टमाटर की जगह लाल गुलाब भेंट किए जाएंगे।”
एक यूजर ने लिखा — “पहले महंगाई के आँसू निकलते थे, अब तो प्याज काटने की भी हिम्मत नहीं बची।”
एक अन्य ने लिखा — “अब शादी-ब्याह में टमाटर से बनी ग्रेवी नहीं, सिर्फ कल्पना परोसनी पड़ेगी।”हालांकि, हास्य के पीछे दर्द साफ झलकता है। पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर पिछले एक साल में लगातार गिर रही है। विदेशी मुद्रा भंडार घट रहे हैं और रुपया डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक निचले स्तर पर है।
भारत से तुलना और आयात की चर्चा
पाकिस्तान के कई अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि भारत के साथ सीमित कृषि व्यापार फिर से शुरू हो जाए तो टमाटर और अन्य सब्जियों की कीमतें स्थिर की जा सकती हैं। भारत में फिलहाल टमाटर की औसत कीमत 40–60 रुपये प्रति किलो है, जो पाकिस्तान की कीमत से दस गुना कम है।अतीत में भी जब पाकिस्तान में बाढ़ या मौसम की मार से फसलें प्रभावित हुई थीं, तब भारत से आयात ने बड़ी राहत दी थी। लेकिन 2019 में अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद भारत-पाक व्यापार पर रोक लगा दी गई थी।वर्तमान संकट ने फिर से इस बहस को जन्म दिया है कि क्या मानवीय और आर्थिक दृष्टि से सीमित कृषि आयात की अनुमति दी जानी चाहिए।
आर्थिक संकट की गहराती तस्वीर
महंगाई का असर सिर्फ सब्जियों तक सीमित नहीं है। गेहूं, दाल, दूध, पेट्रोल और बिजली — सबकी कीमतों में तेज़ उछाल आया है। पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ़ स्टैटिस्टिक्स के अनुसार, सितंबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) 31% तक बढ़ गया है, जो पिछले दशक का सबसे ऊँचा स्तर है।पाकिस्तान पहले से ही आईएमएफ़ के कड़े ऋण शर्तों के तहत काम कर रहा है। पेट्रोल और बिजली पर सब्सिडी खत्म करने के बाद अब आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ा है।आर्थिक विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि राजनीतिक अस्थिरता और सीमा पर तनाव जारी रहे, तो देश में खाद्य सुरक्षा संकट गहरा सकता है।