
गाज़ा में युद्धविराम लागू होने के बाद जहां फिलिस्तीन और इज़राइल में लोगों ने राहत और खुशी का इज़हार किया है, वहीं पाकिस्तान में स्थिति बिल्कुल अलग तस्वीर पेश कर रही है। गाज़ा में दो साल से चल रही भीषण बमबारी के अंत के बाद लोग सड़कों पर जश्न मना रहे हैं, जबकि पाकिस्तान की कट्टरपंथी पार्टी तहरीक-ए-लब्बैक (TLP) ने इस युद्धविराम के खिलाफ हिंसक विरोध शुरू कर दिया है। लाहौर में हिंसा ने भयावह रूप ले लिया है और स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है।
गाज़ा में शांति, पाकिस्तान में उथल-पुथल
गाज़ा में युद्धविराम लागू होते ही नागरिकों को दो वर्षों बाद राहत मिली है। बमबारी और संघर्ष से जर्जर इलाके में लोगों ने सड़कों पर निकलकर शांति का जश्न मनाया। इज़राइल में भी युद्ध समाप्त होने को लेकर कई इलाकों में उत्सव का माहौल रहा। लेकिन पाकिस्तान में कुछ उग्रवादी संगठनों ने इस शांति समझौते को ‘धोखा’ बताते हुए इसका विरोध करना शुरू कर दिया है।कट्टरपंथी संगठन TLP ने लाहौर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन आयोजित किया, जो कुछ ही घंटों में हिंसक दंगों में तब्दील हो गया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस और प्रशासन पर हमला कर दिया और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया।
लाहौर में हिंसा का तांडव
लाहौर में हजारों की संख्या में TLP समर्थक सड़कों पर उतरे। देखते ही देखते प्रदर्शन बेकाबू हो गया। उपद्रवियों ने सैकड़ों वाहनों को आग के हवाले कर दिया। सड़कों पर आगजनी और पथराव से आम नागरिकों में दहशत फैल गई। कई इलाकों में दुकानें बंद कर दी गईं और ट्रैफिक ठप हो गया।हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। एक पुलिसकर्मी की बेरहमी से हत्या कर दी गई। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए भारी पुलिस बल और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।
TLP प्रमुख साद रिजवी घायल
हिंसा के दौरान TLP प्रमुख साद रिजवी भी गंभीर रूप से घायल हो गए। पार्टी की ओर से जारी बयान में दावा किया गया है कि पुलिस फायरिंग में रिजवी को कई गोलियां लगीं हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में रिजवी पुलिस से गोलीबारी बंद करने की अपील करते नजर आ रहे हैं। इस वीडियो में उनके पीछे से लगातार गोलियों की आवाजें आ रही हैं।रिजवी को लाहौर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। इस घटना के बाद TLP कार्यकर्ता और भड़क गए हैं और उन्होंने पूरे पंजाब प्रांत में विरोध प्रदर्शन को और तेज करने की चेतावनी दी है।
अतीत में भी हिंसक प्रदर्शन कर चुका है TLP
यह पहली बार नहीं है जब TLP ने इस तरह की हिंसक गतिविधियां की हैं। इमरान खान के शासनकाल में भी इस संगठन ने फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कार्टून प्रकाशित होने के विरोध में हिंसक प्रदर्शन किया था। उस दौरान भी दर्जनों पुलिसकर्मियों की हत्या की गई थी और सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा था।इस बार भी स्थिति वैसी ही होती दिख रही है। पाकिस्तानी प्रशासन के लिए यह संगठन एक बार फिर कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
पाकिस्तान सरकार अलर्ट पर
हिंसक झड़पों को देखते हुए पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने पंजाब और विशेष रूप से लाहौर में उच्च सतर्कता बरतने के आदेश जारी किए हैं। पुलिस और रेंजर्स को फ्लैग मार्च करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों और दूतावासों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इंटरनेट सेवाओं को भी कुछ इलाकों में बंद कर दिया गया है ताकि अफवाहों का प्रसार रोका जा सके।सरकारी प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा है कि कानून व्यवस्था को किसी भी कीमत पर बिगड़ने नहीं दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा, “यह गाज़ा में युद्धविराम का मामला है, लेकिन पाकिस्तान की ज़मीन पर हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”
विपक्ष ने भी की हिंसा की निंदा
पाकिस्तान की विपक्षी पार्टियों ने भी TLP की हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सरकार से कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। कई विपक्षी नेताओं ने कहा कि धार्मिक मुद्दों के नाम पर हिंसा फैलाना देश के लिए घातक साबित हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें
गाज़ा युद्धविराम के बाद पाकिस्तान में भड़की यह हिंसा अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी चिंता का विषय बन गई है। कई देशों के दूतावासों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अमेरिका और ब्रिटेन ने सुरक्षा स्थिति पर नज़र रखने के लिए अपने स्टाफ को हाई अलर्ट पर रखा है।