
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से कहा कहा है कि अतिथि देवों भव: के लोकाचार के समान नागरिक देवों भव: के सिद्धांत पर कार्य करने वाले अधिकारी के रूप में पहचान बनाएं। केवल प्रशासक के रूप में नहीं, विकसित भारत के वास्तुकार की तरह जिम्मेदारियों को समर्पण और करुणा के साथ पूरा करें।राज्यपाल श्री पटेल आर.सी.व्ही.पी नरोन्हा प्रशासन अकादमी के प्रशिक्षु परिवीक्षाधीन भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल से भारतीय प्रशासनिक सेवा वर्ष 2024 के मध्यप्रदेश कॉडर के अधिकारियों ने राजभवन में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री के.सी. गुप्ता मौजूद थे।राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश जनजातीय बहुल राज्य है। इसका विकास तभी संभव है, जब जनजातियों के कल्याण और विकास के प्रयासों में सहानुभूति और समानुभूति हो। उन्होंने कहा कि गर्व की बात है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आज हमारी जो नीतियाँ है, जो निर्णय हुए है और जो काम वह कर रहे है, वह अगले हजार वर्षों के भविष्य को आकार देने वाले हैं। समय की मांग है कि प्रशासनिक अधिकारी कार्य प्रक्रिया और नीति निर्माण आने वाले वर्षों के समग्र भारत के विकास के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के अनुसार करें।
राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के वर्ष 2024 के मध्यप्रदेश कॉडर के परिवीक्षाधीन अधिकारियों से मुलाकात की और उन्हें संबोधित करते हुए कहा कि:"नागरिक देवो भव:" की भावना से काम करें। जैसे "अतिथि देवो भव:" हमारी परंपरा में आदरणीय है, वैसे ही नागरिकों को भी देवतुल्य मानते हुए संवेदनशीलता और समर्पण से सेवा करें।केवल एक प्रशासक के रूप में नहीं, बल्कि विकसित भारत के वास्तुकार की भूमिका में कार्य करें।कार्यों को सहानुभूति और करुणा के साथ पूरा करें।
मध्यप्रदेश एक जनजातीय बहुल राज्य है, और इसका विकास तभी संभव है जब जनजातीय समुदायों के कल्याण हेतु सहानुभूति और समानुभूति के साथ कार्य किया जाए।उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बनाई गई नीतियों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि आज देश समावेशी विकास की ओर अग्रसर है।इस अवसर पर राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री के.सी. गुप्ता भी उपस्थित थे।